लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संगठन में फेरबदल के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और मोहनलालगंज के पूर्व सांसद कौशल किशोर को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है. पिछले कुछ समय से पार्टी से नाराज चल रहे कौशल किशोर के तेवर अब बदले नजर आ रहे हैं. इसकी वजह उनके बेटे विकास किशोर को बीजेपी अनुसूचित जाति मोर्चा की प्रदेश टीम में अहम जिम्मेदारी मिलना है.
बीजेपी ने विकास किशोर को अनुसूचित जाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है. पार्टी की घोषित नई टीम में कुल 12 प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए हैं. विकास किशोर का नाम भी इसी सूची में शामिल है, इसके बाद कौशल किशोर ने बेटे की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा कर उन्हें बधाई दी और बीजेपी नेतृत्व का आभार जताया.
दरअसल, कुछ समय पहले कौशल किशोर ने बीजेपी से अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी. उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा था कि उन्हें या उनकी पत्नी को टिकट की जरूरत नहीं है, लेकिन वह अपने बेटे के लिए टिकट चाहते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि अगर बेटे को टिकट नहीं मिला तो वह पार्टी के साथ अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं. इसके बाद उनके सपा या कांग्रेस में जाने की अटकलें भी लगने लगी थीं.
कौशल किशोर अवध क्षेत्र में पासी समाज के प्रमुख बीजेपी नेताओं में गिने जाते हैं. ऐसे में बेटे को संगठन में जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका सार्वजनिक रुख बदलना सियासी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, अब वह बीजेपी के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट भी कर रहे हैं.
हालांकि इसे सिर्फ 'पुत्र मोह' कहना या बीजेपी की रणनीतिक पहल मानना राजनीतिक व्याख्या का विषय है. इतना साफ है कि विकास किशोर की नियुक्ति के बाद कौशल किशोर और बीजेपी के बीच सार्वजनिक तौर पर नजर आ रही तल्खी फिलहाल कम होती दिख रही है. 2027 से पहले संगठन में यह नियुक्ति परिवार को साधने के साथ-साथ दलित और पासी वोटरों तक पार्टी की पहुंच के लिहाज से भी चर्चा में है.