नई दिल्ली: बाराबंकी में बीते 72 घंटे से क्या चल रहा है? 1 सितंबर को वहां के रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठी बरसाती है. वो भी तब जब यूपी में सरकार बीजेपी की है और प्रदर्शन करने वाले छात्र ABVP के थे. कई छात्र घायल होते हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाता है. हंगामा बढ़ता है तो पता चलता है यूनिवर्सिटी के पास डिग्री देने की मान्यता ही खत्म हो चुकी है. फिर भी वह बच्चों से जबरन उगाही कर रहा है और पुलिस भी छात्रों का साथ नहीं देती. 2 तारीख को ABVP के सैकड़ों कार्यकर्ता लखनऊ में विधानसभा घेराव करने पहुंच जाते हैं, जहां पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर प्रदर्शन करते हैं. योगी तक बात पहुंचती है तो वहां के सीओ हर्षित चौहान को सस्पेंड कर दिया जाता है.
नगर कोतवाली प्रभारी आऱके राणा और गदिया चौकी के सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया जाता है. लेकिन मामला थमता नहीं, बल्कि अलग-अलग जिलों में मार्च होने लगता है. किसान यूनियन के नेता भी अधिकारियों को ज्ञापन देने लगते हैं. यहां तक कि NSUI जो कांग्रेस की स्टूडेंट विंग है ABVP के समर्थन का ऐलान कर देती है. समाजवादी पार्टी की छात्र सभा के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आते हैं. पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती है.
अखिलेश यादव ट्विट कर सरकार को कोसते हैं. उधर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य घायल बच्चों से मिलने पहुंच जाते हैं, पर इस सवाल का जवाब नहीं दे पाते कि बच्चों को लाठी पड़ी कैसे? पुलिस की थ्योरी कहती है इन लोगों ने तोड़फोड़ की, इन्हें रोकने की पुलिस ने कोशिश की, जबकि अस्पताल से आई तस्वीरें बर्बरता की कहानी साफ बयां कर रही हैं. अब ये मामला हाईप्रोफाइल बन चुका है.
आईजी से लेकर कमिश्नर तक इसका पूरा अपडेट ले रहे हैं. चूंकि पहले डीएम-एसपी को छात्रों ने भगा दिया, उसके बाद आईजी यूनिवर्सिटी पहुंचे तो पूरे मामले की जांच जारी है. उधर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अब सफाई आ रही है, वाइस चांसलर विकास मिश्र कहते हैं, ''हमारे पास BCI से 2022-23 तक की मान्यता है. 2023-24 की ऑनलाइन मान्यता है. अभी BCI ने पत्र जारी नहीं किया है. मैं बच्चों को बताना चाहता हूं कि BCI ने व्यवस्था में कमी नहीं बताई है. हर स्तर पर हम लगे हैं.''
यानि छात्रों के आरोपों में दम दिखता है. जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है. योगी आगे क्या एक्शन लेते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि ये सिर्फ छात्रों का मसला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में चल रही धांधली और पुलिसकर्मियों की मनमानी से भी जुड़ा है.