मथुरा: कवि कुमार विश्वास ने धार की भोजशाला मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि उन्हें कई बार उस पवित्र स्थल पर जाने और वहां मत्था टेकने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि इस फैसले से उनका हृदय खुशी से भर गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का जिक्र करते हुए विश्वास ने कहा कि जब प्रधानमंत्री जनता से कोई अनुरोध करते हैं तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए.
'हमारा DNA राम-कृष्ण का है'
कुमार विश्वास ने कहा कि कुछ सदियों पहले किसी दुर्घटना के चलते कोई व्यक्ति दूसरे धर्म में चला गया हो, तो उसका मूल DNA भारतीय ही है. वह राम का है, कृष्ण का है. उन्होंने कामना की कि भोजशाला में भी मुक्ति का पर्व शुरू हो और देवी सरस्वती अपने पूर्ण वैभव के साथ विराजमान हों. उन्होंने कहा कि आज विश्व अशांति से भरा है, ऐसे में मनीषा, बुद्धि और संस्कृति की देवी सरस्वती ही हमारे हृदय में सत्य, शिव और सुंदर का संचार करेंगी.
महाराज भोज और भोजशाला का महत्व
विश्वास ने महाराज भोज की स्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि वे भारतीय संस्कृति, साहित्य और कला के महान संरक्षक थे. कालिदास जैसे महाकवियों को आश्रय देने वाले भोज के काल में सरस्वती का वास भोजशाला में था. अब भारतीय न्याय संहिता के तहत वहां सकारात्मक फैसला आया है, जो बेहद खुशी की बात है.
अन्य स्थलों पर भी न्याय की उम्मीद
कवि ने आशा जताई कि काशी, मथुरा समेत देश के अन्य गौरवशाली सांस्कृतिक स्थलों पर भी न्याय मिले. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक भाई-बहन भी यह समझें कि वे भी इस देश के अभिन्न अंग हैं और भारतीय अस्मिता के गौरव में उनका भी हिस्सा है.
राम जन्मभूमि का जिक्र
कुमार विश्वास ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन से उनका बचपन से ही गहरा नाता रहा है. उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भगवान राम अपने विग्रह में विराजमान हुए, जिसका उन्हें साक्षी बनने का सौभाग्य मिला. अब भोजशाला का फैसला आने से उनके मन में दोगुनी खुशी है. इस बयान को आसिफ उद्दीन ओवैसी के बयान के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. कुमार विश्वास ने साफ शब्दों में सांस्कृतिक न्याय और भारतीय पहचान पर जोर दिया.