सोनिया गांधी की इस तस्वीर ने कांग्रेस के कई नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी है, वो साफ-साफ कह रहे हैं जिस दौर में पार्टी कमजोर है, उस दौर में सोनिया गांधी का लोकसभा सीट छोड़कर राज्यसभा जाना ठीक संकेत नहीं है। यूपी में हमारे पास सिर्फ एक ही लोकसभा सीट बची है, अब उनके जाने से 2024 में उसके जीतने की उम्मीद भी कम नजर आ रही है, ये तस्वीर राजस्थान की है, जब सोनिया गांधी राज्यसभा के लिए पर्चा भरने पहुंची, उनके साथ राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खड़े हैं, अपनी न्याय यात्रा बीच में रोककर आए राहुल गांधी भी हैं और उनकी तथाकथित उत्तराधिकारी मानी जा रही प्रियंका गांधी भी नजर आ रही है। जिन्हें रायबरेली से सोनिया की जगह कांग्रेस का उम्मीदवार बताया जा रहा है, पर प्रियंका का रायबरेली से जीतना मुश्किल नजर आता है।
लेकिन पिछले चुनाव में स्मृति ईरानी ने जो खेल किया, वही रायबरेली सीट पर भी इस बार दोहराया जा सकता है। रायबरेली सीट से अगर प्रियंका ने चुनाव लड़ा तो बीजेपी अदिति सिंह को उतार सकती हैं। 37 साल की अदिति सिंह के पिता अलग-अलग पार्टियों से 5 बार रायबरेली का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। दिल्ली और मैसूर से पढ़कर आईं अदिति सिंह की पकड़ भी अपने एरिया में अच्छी है। यही वजह है कि साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अदिति सिंह 90 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल कर विधायक बनीं थी, पर बीजेपी से नजदीकी के आरोपों के कारण कांग्रेस ने अदिति सिंह को पार्टी से निकाल दिया और फिर वो साल 2021 में बीजेपी में शामिल हो गईं।
इस बार चूंकि मोदी सरकार ने खुद महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का कानून बनाया है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया जा सकता है। 80 विधानसभा सीटों वाले यूपी का गणित अगर लगाएं तो 20 से ज्यादा महिलाओं को टिकट मिल सकती है, जिसमें अदिति सिंह का नाम भी शामिल हो सकता है। जिसके बाद उन्हें स्मृति ईरानी की तरह ही खुद को साबित करके दिखाना होगा। लेकिन उससे पहले आपका ये जानना भी जरूरी है कि सोनिया गांधी ने राजस्थान को ही राज्यसभा के लिए क्यों चुना।