Lucknow Fire Case : बिल्डिंग वीरेन्द्र शुक्ला की और नक्शा धीरेन्द्र और सुरेन्द्र शुक्ला के नाम पास था. 15 लोगों की मौत के गुनाहगारों की कुंडली खुल गई है. पहले योगी न दौरा किया, फिर मीटिंग बुलाई.अधिकारियों से चार सवाल पूछे और आधी रात तक जागकर अपडेट लेते रहे. वो मां जिसकी आंखों के सामने उसका बच्चा चला गया, वो बहन जिसे भाई ने आखिरी कॉल किया, पर वो उठा नहीं पाई और वो पिता जो अपने बच्चे को कामयाब होते देखना चाहता था. लखनऊ अग्निकांड के बाद से टूट सा गया है.
15 परिवारों की चीख-पुकार पूरे प्रदेश में गूंज रही है और वो चीख-चीखकर यही कह रहे हैं सिस्टम ने हमारे बच्चे को हमसे छीन लिया. अब फायर ब्रिगेड की गाड़ी तो तय समय पर पहुंची, राहत-बचाव कार्य में भी तेजी दिखी. खुद योगी आदित्यनाथ अपना दौरा छोड़कर वहां पहुंचे, फिर लापरवाही कहां हुई, इसकी कुंडली तब खुलती है, जब सीएम योगी आदित्यनाथ रात में ही हाईलेवल मीटिंग बुलाते हैं. एसआईटी गठित करते हैं. 4 आरोपी गिरफ्तार किए जाते हैं, और फिर 3 बड़े खुलासे होते हैं.
जिस बिल्डिंग में आग लगी वो अवैध थी. साल 2016 में इसके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था, लेकिन दो महीने से भी कम समय में यह आदेश वापस ले लिया गया. तो सवाल है किसके दबाव में ऐसा किया गया. अब इस बिल्डिंग पर बुलडोजर कार्रवाई होने की बात कही जा रही है. इस बिल्डिंग के लिए जमीन 11 जुलाई 1980 को लॉटरी के जरिए विजय कुमार को आवंटित की गई थी. 4 नवंबर 1980 को उन्हें कब्जा सौंप दिया गया. 19 जनवरी 2013 को यह संपत्ति वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को बेच दी गई.
7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने नए मालिकों के नाम जमीन कर दी, इसके बाद बिल्डिंग का निर्माण कराया गया. यानि जमीन की खरीद बिक्री होती रही. 1992 वर्गफुट क्षेत्रफल वाली इस इमारत का नक्शा 20 अगस्त 2014 को आवासीय उपयोग के लिए पास किया गया था, हालांकि, कुछ समय बाद प्राधिकरण को पता चला कि निर्माण नियमों के खिलाफ किया गया है, नतीजा ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था, लेकिन फिर वो रुक गया और कुछ समय बाद वहां कॉमर्शियल चीजें शुरू हो गई.
जिसका सीधा सा मतलब है, जेब गरम करने वाली प्रथा, सरकारी सिस्टम की लापरवाही और अधिकारियों की नींद न टूटने वाली व्यवस्था ने 15 छात्रों को उनके मां-बाप से छीन लिया, जिनकी उम्र करीब 20-25 साल के बीच थी, जो एनिमेशन सीखकर, पढ़ाई लिखाई करके कुछ करना चाहते थे, उनकी जिंदगियां सिस्टम के आगे स्वाहा हो गई. उस मंजर का अंदाजा आप स बात से लगा सकते हैं इस घटना से ठीक पहले एक छात्र का जन्मदिन मनाया जा रहा था. माहौल खुशियों से भरा था, लेकिन कुछ ही मिनटों में सब कुछ बदल गया और माहौल चीख-पुकार में बदल गया. अब ख़बर है.
एलडीए के कई इंजीनियरों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है. वर्ष 2014 से अब तक इस क्षेत्र में तैनात अधिकारियों का रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. जांच के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई होने की उम्मीद है.
सीएम योगी का मिजाज बता रहा है एक्शन बड़ा और कड़ा होने वाला है, जिसका असर दूसरे जिलों में भी दिखने लगा है. कानपुर में नियम का उल्लंघन करने वाले करीब 20 कोचिंग सेंटर पर प्रशासन ने ताला जड़ दिया है, इनमें कई नामी कोचिंग शामिल है. जबकि, कन्नौज से लेकर दूसरे जिलों में भी ऐसे ही लापरवाह कोचिंग संचालकों पर शिकंजा कसा जाना शुरू हो चुका है, पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर सरकार ऐसा क्या करे कि ऐसी घटनाएं कभी दोबारा न हो, सोचिए और जवाब जरूर दीजिए.