Lucknow Fire Case : लखनऊ अग्निकांड को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, कोई जांच की बात कर रहा, तो कोई बुलडोजर एक्शन की, लेकिन जिन लोगों ने जान गंवाई उनके बारे में जानना भी जरूरी है. उनकी जो लिस्ट सामने आई है, उसके मुताबिक मृतकों में यूपी के 11, पश्चिम बंगाल के 2, मध्य प्रदेश और हरियाणा के 1-1 लोग शामिल हैं.
ज्यादातर की उम्र 20 से 30 साल के बीच है, जो लोग अब इस दुनिया में नहीं रहे, ये उनकी तस्वीरें हैं, इनमें लखनऊ की रहने वाली अनूछा राय, कोलकाता की अनामिका सामंता, साउथ 24 परगना के सौमल्या बेरा, कानपुर गोविंदनगर के संयम विज, कानपुर गोविंदनगर के सूरज सिंह, लखनऊ मायापुरी कॉलोनी के सागर पंत, लखनऊ आलमबाग के सुखमणि सिंह, लखनऊ चिनहट की ज्योति, बाराबंकी के मोहम्मद अम्मार लखनऊ के नीलेश कुमार, मध्य प्रदेश के जयनील चक्रबर्ती, लखनऊ के अब्दुल रहमान, सीतापुर के आदित्य श्रीवास्तव, लखनऊ के शहजान सिद्दीकी और सोनीपत हरियाणा के भविष्य शर्मा है.
इनकी मां पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर रोते-रोते बेहोश हो गईं. जबकि 25 साल के आदित्य श्रीवास्तव जो एनिमेशन स्टूडियो में काम करते थे. सुबह उनका शव घर पहुंचा तो बहन निष्ठा भाई के शव से लिपटकर रोने लगी. उनके सहकर्मी धीरज मेहरा ने बताया कि आदित्य ने उन्हें बिल्डिंग के अंदर से फोन किया था और मदद की गुहार लगाई थी. आदित्य ने कहा था बचा लो, और इसके बाद धीरज मौके की तरफ दौड़े. लेकिन जब तक वह पहुंचे, बिल्डिंग में पूरी तरह धुआं भर चुका था.
आदित्य की मां ने रोते हुए बताया कि अगर सही समय पर ध्यान दिया जाता तो शायद बच्चों को बचाया जा सकता था. उन्होंने बताया कि उनका बेटा एनिमेशन स्टूडियो में काम करता था और वह दोपहर करीब सवा दो बजे मौके पर पहुंची थीं, लेकिन फोन पर किसी ने जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि अगर थोड़ा और ध्यान दिया जाता तो उनका बेटा आज जिंदा होता और उनकी पूरी दुनिया उजड़ गई है.
इनके अलावा इस घटना में जान गंवाने वाले रहमान के परिवार ने बुलडोजर एक्शन की मांग की है. रहमान के भाई मोहम्मद हाजिम सिद्दीकी का कहना है हमें रात आठ बजे पता चला कि इस अग्निकांड में हमारे भाई रहमान की मौत हो गई है. उन्होंने बताया कि वह घर का अकेला कमाने वाला था, क्योंकि उनके पिता विकलांग है और मां टीचिंग करती है. उसकी यहां दो-तीन महीने पहले ही जॉब लगी थी. वो यहां पढ़ाई के साथ-साथ जॉब भी कर रहा था. उसके कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी. इस आग्निकांड की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को ज्यादा से ज्यादा मुआवजा दिया जाए, ताकि उनके परिवार का भरणपोषण हो सके.
आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन होना चाहिए. इनके अलावा एक लड़की जो इस घटना में बाल-बाल बची उसने जो बताया वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था. उसने बताया कि मैं बिल्डिंग में नौकरी करती थी. जब आग लगी और अफरातफरी मची को निकलने का कोई रास्ता नहीं था. मैं पाइप के सहारे नीचे उतरी. उससे पहले हम बुरी हालत में घबराए हुए फोन मिलाते रहे, कोई फोन ही नहीं उठा रहा था. कोई रास्ता नहीं था तो खिड़की तोड़कर पाइप के सहारे से नीचे उतरी.
कुछ पीड़ितों के हवाले से ये दावा भी किया जा रहा है कि अगर समय पर फायर ब्रिगेड की मदद पहुंचती तो शायद हादसे में इतने लोगों की जान नहीं जाती, इस मामले को लेकर भी अब जांच हो सकती है...योगी सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद पीड़ित परिवारों की दी गई है, जबकि पीएम मोदी ने 2 लाख की मदद का ऐलान किया है, पर सवाल है आखिर ये घटनाएं कब रुकेंगी.