आरा: बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को हुए पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी मामले में बड़ा विकास हुआ है. मृतक की मां आशा देवी के आवेदन पर शाहपुर थाने में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. एफआईआर में जगदीशपुर के एसडीपीओ डीएसपी राजेश शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है.
मां का गंभीर आरोप
आशा देवी ने आरोप लगाया कि 17 जून सुबह पुलिस टीम उनके घर पहुंची और भरत को जवइनिया बाढ़ विस्थापितों की जमीन पर ले गई. वहां भरत ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर गड्ढे में गिरा दिया. मां का दावा है कि डीएसपी के गोली चलाने के आदेश पर पुलिसवालों ने भरत पर 5 गोलियां दाग दीं. इसके बाद उसे गाड़ी में लादकर ले जाया गया और शाम को मौत की खबर आई.
पुलिस के अनुसार, भरत सरेंडर का नाटक कर रहा था. उसने पिस्टल उठाकर गोली चलाई, जिसके जवाब में फायरिंग हुई. पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल एक गोली (पैर में) का जिक्र था, जबकि परिवार 5 गोलियों का आरोप लगा रहा है. एनकाउंटर के तुरंत बाद थानेदार राजेश मालाकार समेत 5 पुलिसकर्मी निलंबित. भरत तिवारी लंबे समय से सोशल मीडिया पर पुलिस-प्रशासन के खिलाफ पोस्ट और फेसबुक लाइव कर रहा था.
सियासी हलचल तेज
विपक्ष के साथ BJP और JDU के नेता भी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन परिवार को भरोसा नहीं. भरत तिवारी की मौत अब बिहार में बड़ा मुद्दा बन चुकी है. एक तरफ परिवार और स्थानीय लोग एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस सरेंडर के नाटक का दावा कर रही है. मामले की जांच इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है.