लखनऊ : 4700 करोड़ रुपये की लागत से बना लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों बाद सवालों के घेरे में आ गया है. 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में इसका उद्घाटन किया था, लेकिन अब एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में दरारें और सड़क धंसने की घटनाएं सामने आने के बाद इसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पर करीब 40 स्थानों पर क्रैक और क्षति के निशान मिले हैं. लगातार बारिश के बाद कई हिस्सों में सड़क धंसने की शिकायतें भी सामने आईं, इसके बाद मरम्मत का काम शुरू किया गया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. इन तस्वीरों में पैचिंग के बाद सड़क को जल्दी सुखाने के लिए कई बड़े पंखों का इस्तेमाल होता दिखाई दे रहा है.
इस मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की मांग कर रहा है. दूसरी ओर संबंधित एजेंसियों का कहना है कि भारी बारिश और मौसम की वजह से कुछ स्थानों पर नुकसान हुआ है, जिसकी तत्काल मरम्मत की जा रही है.
अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है. गौरतलब है कि सड़क में आई तकनीकी खामियों के बाद संबंधित प्राधिकरण ने मरम्मत पूरी होने तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी अस्थायी रूप से रोक दी है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में सड़क की गुणवत्ता को लेकर क्या निष्कर्ष निकलते हैं और जिम्मेदारी किसकी तय होती है.
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे (एनई-6) को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उठ रहे सवालों के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर फैलाई जा रही कई बातें भ्रामक हैं. प्राधिकरण के अनुसार, एक्सप्रेसवे का 98 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित और अच्छी स्थिति में है तथा केवल कुछ सीमित स्थानों पर क्षति दर्ज की गई है, जिनकी मरम्मत युद्धस्तर पर कराई जा रही है.
NHAI ने बताया कि प्रभावित हिस्सों पर विशेषज्ञों की निगरानी में तेजी से सुधार कार्य चल रहा है. यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन स्थानों को जल्द से जल्द दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा गया है. मरम्मत कार्य पूरा होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली अस्थायी रूप से स्थगित रहेगी, ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े.
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा पहले की तरह 120 किलोमीटर प्रति घंटा ही रहेगी. अधिकांश मार्ग पर यातायात सामान्य और सुचारु रूप से संचालित हो रहा है तथा यात्रियों को किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है.
साथ ही, निर्माण कार्य में लापरवाही के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। NHAI के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी किए गए हैं और कुछ अधिकारियों के विरुद्ध चार्जशीट की प्रक्रिया भी शुरू की गई है. प्राधिकरण का कहना है कि गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
NHAI ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट दावों और अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें.