लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने नाबालिग किशोरी के साथ शारीरिक उत्पीड़न, धमकी और ब्लैकमेलिंग के गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एक कथित फर्जी पत्रकार को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान का पत्रकार बताकर रौब झाड़ता था और इलाके में अपना प्रभाव दिखाने के लिए सत्ताधारी गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेताओं व पदाधिकारियों से नजदीकियों का दावा करता था। पुलिस ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
पहचान छिपाकर बनाया शिकार, दी जा रही थी धमकी पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़िता के परिजनों ने थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि आरोपी लंबे समय से नाबालिग को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। आरोपी ने खुद को एक बड़ा मीडियाकर्मी और राजनीतिक रसूखदार व्यक्ति बताकर परिवार पर दबाव बनाया। विरोध करने पर आरोपी पीड़िता और उसके परिजनों को गंभीर परिणाम भुगतने और बदनाम करने की लगातार धमकी दे रहा था।
परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने गोपनीय तरीके से मामले की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में ही आरोपी द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रेस कार्ड और पहचान पत्र फर्जी पाए गए।
राजनीतिक रसूख और पार्टी के नाम के दुरुपयोग की जांच मामले में सबसे संवेदनशील पहलू आरोपी का राजनीतिक संपर्कों का दावा रहा है। जांच में सामने आया कि आरोपी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बचने के लिए एनडीए गठबंधन में शामिल सहयोगी दल के स्थानीय कार्यालयों और कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दिखाता था। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अपराध में संलिप्त किसी भी व्यक्ति के रसूख या राजनीतिक दावों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून के तहत निष्पक्ष जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी ने पार्टी के नाम या फर्जी पद का इस्तेमाल कर अन्य लोगों से भी धोखाधड़ी की है।
पुलिस की सख्त कार्रवाई लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़, धमकी और फर्जी पहचान पत्र (जालसाजी) से जुड़े गंभीर आरोपों में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके पास से बरामद फर्जी पहचान पत्रों व डिजिटल साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।