राज्यसभा में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े मल्लिकार्जुन खड़गे, लाठीचार्ज से पहले क्यों नहीं आई यूथ की याद?

Rahul Jadaun 22 Jul 2026 03:44: PM 2 Mins
राज्यसभा में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े मल्लिकार्जुन खड़गे, लाठीचार्ज से पहले क्यों नहीं आई यूथ की याद?

नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन भी NEET-UG पेपर लीक मामले और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन पर हंगामा जारी रहा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब तक शिक्षा मंत्री पद से नहीं हटते, तब तक किसी मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होने दी जाएगी।

दूसरी ओर, सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार NEET-UG मुद्दे पर पूरे समय चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है।

"शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो, तभी होगी चर्चा"

राज्यसभा में खड़गे ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और जब तक धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष कोई सामान्य कार्यवाही नहीं चलने देगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली में युवाओं व नेताओं पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।

टाइमिंग पर उठते गंभीर सवाल: लाठीचार्ज से पहले क्यों दूरी?

एक तरफ खड़गे संसद में युवाओं के हक की लड़ाई का झंडा बुलंद कर रहे हैं, तो वहीं राजनीतिक विश्लेषक और जमीनी घटनाक्रम के जानकार कांग्रेस के इस अचानक जागे 'यूथ प्रेम' पर कड़े सवाल भी उठा रहे हैं।

  1. आंदोलन के शुरुआती दौर से नदारद रहना: जंतर-मंतर पर CJP और NEET अभ्यर्थी जब दिनों से कड़ाके की धूप और सड़क पर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे थे, तब किसी बड़े कांग्रेसी शीर्ष नेता ने उस आंदोलन के मंच पर जाकर सीधे उनका हाथ नहीं थामा।
  2. सहानुभूति की राजनीति का आरोप: जब 20 और 21 जुलाई को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, लाठियां चलीं और माहौल में आक्रोश व सहानुभूति (Sympathy) फैली, तब कांग्रेस के दिग्गज नेता मार्च निकालने और हिरासत में दिए जाने के लिए सड़क पर उतरे।
  3. क्या केवल राजनीतिक लाभ की होड़? विपक्षी दलों पर सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें युवाओं और छात्रों के वास्तविक मुद्दों की फिक्र है, या फिर वे सड़क पर हुए टकराव के बाद बनी राजनीतिक पृष्ठभूमि को 2026 के संसद सत्र में केवल एक 'हथियार' की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं?

सदन में सरकार जहाँ चर्चा की बात कहकर गेंद विपक्ष के पाले में डाल रही है, वहीं विपक्ष इस्तीफे की शर्त रखकर गतिरोध बनाए हुए है। लेकिन इन सबके बीच यह सवाल बना हुआ है कि अगर विपक्ष शुरुआत से ही आंदोलन के साथ खुलकर खड़ा होता, तो शायद युवाओं को लाठियां न खानी पड़तीं।

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