नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन भी NEET-UG पेपर लीक मामले और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन पर हंगामा जारी रहा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब तक शिक्षा मंत्री पद से नहीं हटते, तब तक किसी मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होने दी जाएगी।
दूसरी ओर, सदन के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार NEET-UG मुद्दे पर पूरे समय चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहा है।
"शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो, तभी होगी चर्चा"
राज्यसभा में खड़गे ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और जब तक धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष कोई सामान्य कार्यवाही नहीं चलने देगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली में युवाओं व नेताओं पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।
टाइमिंग पर उठते गंभीर सवाल: लाठीचार्ज से पहले क्यों दूरी?
एक तरफ खड़गे संसद में युवाओं के हक की लड़ाई का झंडा बुलंद कर रहे हैं, तो वहीं राजनीतिक विश्लेषक और जमीनी घटनाक्रम के जानकार कांग्रेस के इस अचानक जागे 'यूथ प्रेम' पर कड़े सवाल भी उठा रहे हैं।
सदन में सरकार जहाँ चर्चा की बात कहकर गेंद विपक्ष के पाले में डाल रही है, वहीं विपक्ष इस्तीफे की शर्त रखकर गतिरोध बनाए हुए है। लेकिन इन सबके बीच यह सवाल बना हुआ है कि अगर विपक्ष शुरुआत से ही आंदोलन के साथ खुलकर खड़ा होता, तो शायद युवाओं को लाठियां न खानी पड़तीं।