पश्चिम बंगाल : कोलकाता में मंगलवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब पश्चिम बंगाल अपराध जांच विभाग की एक टीम तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची, उस दौरान ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर थीं, जहां उन्होंने विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया था. सीआईडी के पहुंचने की खबर सामने आते ही राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई.
टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखा. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की अनुपस्थिति में उनके आवास पर जांच एजेंसी का पहुंचना कई सवाल खड़े करता है. घोष ने दावा किया कि उन्हें आवास के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी भी नहीं दी गई कि सीआईडी की टीम किस उद्देश्य से वहां पहुंची है.
कुणाल घोष ने कहा कि उनकी पार्टी कानून और संविधान का सम्मान करती है, लेकिन बिना स्पष्ट जानकारी के इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिह्न लगाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है.
बताया जा रहा है कि सीआईडी की यह गतिविधि ऐसे समय में हुई है जब राज्य में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच चल रही है. इसी मामले में कुछ दिन पहले जांच एजेंसी की टीम टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास पर भी पहुंची थी. जांच के तहत पार्टी के कुछ विधायकों के कथित जाली हस्ताक्षरों की पड़ताल की जा रही है.
सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों और पार्टी के आधिकारिक प्रस्तावों की सत्यता की जांच कर रही है. हालांकि, सीआईडी की ओर से ममता बनर्जी के आवास पर पहुंचने के कारणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.