नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने राज्य में चल रहे निर्वाचक नामावली के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ भारत के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. बनर्जी ने रिट याचिका दायर की है जिसमें भारत के चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है.
अपनी याचिका में उन्होंने राज्य में चल रहे SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. यह याचिका 28 जनवरी को दायर की गई थी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार शाम को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक और पत्र लिखा, जिसमें राज्य में चल रहे निर्वाचक नामावली के विशेष गहन संशोधन (SIR) की कार्यप्रणाली और अपनाए गए दृष्टिकोण पर आपत्ति जताई.
पत्र में बनर्जी ने अपनी पिछली पत्राचार का जिक्र करते हुए दोहराया कि इस अभ्यास से लोगों को “अत्यधिक असुविधा और पीड़ा” हुई है, जिसके परिणामस्वरूप प्रक्रिया के दौरान “कम से कम 140 लोगों की मौत” हो गई. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR को लागू “कानून और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन” करते हुए किया जा रहा है, तथा “मानवाधिकारों और बुनियादी मानवीय विचारों की पूरी तरह अनदेखी” की जा रही है.
उन्होंने लिखा, “मुझे पुनः आपको लिखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे निर्वाचक नामावली के विशेष गहन संशोधन (SIR) में अपनाई जा रही कार्यप्रणाली और दृष्टिकोण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों से परे है.”
बनर्जी ने यह भी बताया कि भारत के निर्वाचन इतिहास में पहली बार चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में लगभग 8,100 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन माइक्रो ऑब्जर्वरों को एकतरफा तरीके से बिना पर्याप्त प्रशिक्षण या प्रदर्शित विशेषज्ञता के साथ लगाया गया है, जबकि यह एक विशेष, संवेदनशील और अर्ध-न्यायिक कार्य है.