बगावत के बीच अभिषेक के साथ खड़ी दिखीं ममता, विपक्ष के नेता की नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी TMC

Amanat Ansari 05 Jun 2026 08:20: PM 2 Mins
बगावत के बीच अभिषेक के साथ खड़ी दिखीं ममता, विपक्ष के नेता की नियुक्ति के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी TMC

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस द्वारा रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता (LoP) मान्यता दिए जाने के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है. पार्टी ने इस फैसले को गैरकानूनी बताया है.

इस निर्णय को चुनौती देने का फैसला कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर TMC प्रमुख ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया. पार्टी सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है.

बैठक के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, "स्पीकर द्वारा नियुक्त विपक्ष का नेता अवैध है. हम इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे." उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी. उनका आरोप था कि भाजपा TMC कार्यकर्ताओं की हत्या करा रही है और उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करा रही है.

कल्याण बनर्जी ने कहा कि बागी विधायकों को पहले अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की जनता से मंजूरी लेनी चाहिए और नया जनादेश हासिल करना चाहिए. उन्होंने दोहराया कि ममता बनर्जी ही पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा हैं और विधायक जनता तथा संगठन के समर्थन के बिना कोई स्वतंत्र जनादेश नहीं रखते.

ममता ने किया TMC संगठन का पुनर्गठन

इस बीच तीन बार की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया और नए प्रवक्ताओं तथा विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रमुखों की नियुक्ति की.

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बरकरार रखा है, जबकि वह स्वयं पार्टी अध्यक्ष बनी रहेंगी. वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन संयुक्त सचिव के रूप में अभिषेक की सहायता करेंगे.

पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को TMC का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. वहीं सायोनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता माला रॉय को महिला तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

अभिषेक के खिलाफ रितब्रत की बगावत

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में चुने गए TMC के 80 में से 60 विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी.

हालांकि, 60 विधायकों के समर्थन वाले पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री को ही पार्टी का नेता बनाए रखने की बात भी कही गई थी.

इसके बाद बागी गुट ने ममता बनर्जी की पसंद शोभनदेव चट्टोपाध्याय को खारिज करते हुए रितब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता पद के लिए समर्थन दिया. बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें LoP के रूप में मान्यता दे दी, जिससे पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो गया.

राजनीतिक हलकों में इस कदम को अभिषेक बनर्जी को घेरने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. उलूबेरिया पूर्व के विधायक रितब्रत बनर्जी कई बार अभिषेक पर पार्टी को एक कॉरपोरेट संस्था की तरह चलाने का आरोप लगा चुके हैं.

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