बांग्लादेश जैसा बंगाल में तख्तापलट, ममता का भतीजा बगावत को तैयार!

Global Bharat 22 Aug 2024 06:53: PM 3 Mins
बांग्लादेश जैसा बंगाल में तख्तापलट, ममता का भतीजा बगावत को तैयार!

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां पर दावा किया जा रहा है कि वर्तमान बंगाल की सरकार कभी भी भरभराकर गिर सकती है. यानी जैसा बांग्लादेश में हुआ ठीक वैसा ही पश्चिम बंगाल में भी होने वाला है. अर्थात ममता बनर्जी के लिए ऐसा मोड़ आ सकता है, जहां पर गाड़ी की ड्राइवर ‘’दीदी’’ नहीं बल्कि उनके भतीजे अभेषक बनर्जी होंगे.

बताते चलें कि बंगाल में प्रशिक्षु डॉक्टर की रेप के बाद हत्या के मामले में टीएमसी सरकार और पश्चिम बंगाल पुलिस दोनों कठघरे में है. घटना के बाद पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश में अभी भी विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य की पुलिस को लगातार लताड़ रही है. इसी बीच एक ऐसी खबर निकलकर सामने आई है, जिससे पता चलता है कि ममता बनर्जी अपनी ही पार्टी में भी विरोध से जूझ रही हैं.

सूत्रों ने दावा किया है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुई अपराध के बाद जिस तरह सरकार ने इस केस को हैंडल किया, उससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी नाराज हैं और बुआ-भतीजे की इस खटपट के कारण पार्टी के नेता भी दो गुटों में बंटते नजर आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने भी अभिषेक गुट के मीडिया मैनेजमेंट संभाल रही टीम को साइड लाइन कर दिया है और ममता बनर्जी की टीम ही अब पूरे मामले की निगरानी कर रही है.

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच मतभेद पूर्व प्रिंसिपल के ट्रांसफर से शुरू हुआ था. बता दें कि 14 अगस्त को जब प्रशिक्षु डॉक्टर से रेप-मर्डर की खबर से लोग गुस्से में थे, तुरंत ममता  सरकार ने आरजी कल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष को सस्पेंड कर दिया, फिर तुरंत कोलकाता के प्रतिष्ठित नेशनल मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति भी दे दी. बाद में हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया था.

इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि अभिषेक बनर्जी प्रिसिंपल के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने के पक्ष में थे मगर ऐसा हो नहीं सकता. इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने खुद को इस विवाद से अलग कर लिया और चुप होकर बैठ गए. दावा किया जा रहा है कि उनका मानना था कि पार्टी की छवि सुधारने के लिए कड़ा फैसला लेना जरूरी है. वहीं डॉक्टरों के प्रदर्शन के दौरान हॉस्पिटल में तोड़फोड़ हुई तो सांसद बनर्जी ने कड़े एक्शन की मांग कर दी. उन्होंने इसे लेकर पुलिस आयुक्त को फोन करके त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए. लेकिन ममता बनर्जी को यह पसंद नहीं आया.

बता दें कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की दूरी पहली बार उस समय नजर आई, जब ममता बनर्जी ने घटना के विरोध में पदयात्रा निकाली. इस दौरान अभिषेक बनर्जी पदयात्रा से भी दूर थे. इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे पर एक भी बयान नहीं दिया, जबकि ममता बनर्जी के समर्थक नेता लगातार उनका बचाव करते नजर आए. इस बीच ममता बनर्जी ने एक कदम आगे बढ़कर अभिषेक बनर्जी को रैलियों में शामिल होने और जिम्मेदारी संभालने की सलाह दी, जिसे अभिषेक ने नजरअंदाज कर दिया. यह दायरा उस समय और चौड़ा हो गया जब पूर्व राज्यसभा सभा सांसद शांतनु सेन ने आरजी कर हॉस्पिटल में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे.

शांतनु ने कहा था कि वह अस्पताल के एलुमनी रहे हैं और उनकी बेटी भी वहां पढ़ती है, मगर वह असमंजस में हैं कि अपनी बेटी को आरजी कर में नाइट ड्यूटी पर भेजूं या नहीं. इस बयान के बाद माना चर्चा चली थी कि अभिषेक बनर्जी के इशारे पर ही उन्होंने इतनी बड़ी टिप्पणी की. फिर ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया.

खबर यह भी आ रही है कि अभिषेक बनर्जी सितंबर में आंख की सर्जरी के लिए न्यूयॉर्क जाने वाले हैं. राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आरजी कर हॉस्पिटल विवाद से निपटने के बाद सीएम ममता बनर्जी संगठन में फेरबदल कर सकती हैं, यानी अभिषेक बनर्जी के पड़ और कतरे जा सकते हैं.

Recent News