मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ के खरखौदा क्षेत्र में स्थित जामा मस्जिद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. पुलिस और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मस्जिद प्रबंधन को सात दिन का नोटिस जारी किया गया है. प्रशासन का दावा है कि जामा मस्जिद का निर्माण उस जमीन पर किया गया है जो राजस्व अभिलेखों में खरखौदा थाने के लिए दर्ज है.
जानकारी के मुताबिक राजस्व विभाग द्वारा की गई जांच में यह सामने आया कि मस्जिद का निर्माण थाने के लिए आवंटित भूमि के भीतर किया गया है, इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मस्जिद के मुतवल्ली और प्रबंधन समिति को नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है. नोटिस में चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है. मस्जिद कमेटी का कहना है कि जामा मस्जिद करीब 200 साल पुरानी है और इसका अस्तित्व थाने की स्थापना से पहले का है. मस्जिद के मुतवल्ली अय्यूब सैफी का कहना है कि उन्हें नोटिस मिला है और वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखेंगे. उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मस्जिद प्रबंधन अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगा.
वहीं उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर ने कहा कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन कानून और राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई करेगा और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. फिलहाल नोटिस जारी होने के बाद क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है. अब सभी की नजर सात दिन की अवधि पूरी होने के बाद प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हुई है.