नई दिल्ली: भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को शनिवार को बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया. कथित तौर पर भारत में उसके प्रत्यर्पण की तैयारी चल रही है. हालांकि, चोकसी कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहा है. उसकी बचाव टीम द्वारा जमानत मांगने और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को चुनौती देने की उम्मीद है. कानूनी टीम ने अनुरोध का विरोध करने के लिए उसकी स्वास्थ्य स्थिति और अन्य कारकों का हवाला दिया है. चोकसी 2 जनवरी, 2018 को भारत से भाग गया था.
वह अपने भतीजे नीरव मोदी के साथ लगभग 14,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी में कथित भूमिका के लिए सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा वांछित है. बता दें कि चौकसी पर यह एक्शन भारतीय एजेंसियों यानी सीबीआई और ईडी के अनुरोध पर लिया गया है. गिरफ्तारी के बाद उसे बेल्जियम डिटेंशन सेंटर रखा गया है. उधर चोकसी के वकील दावा कर रहे हैं कि उसे भारत लाना आसान नहीं होगा, इधर भारत सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि देश के अपराधी को जल्द से जल्द लाया जाए और कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए.
अब सवाल यह उठता है कि जो अपराधी 2018 से लगातार चकमा दे रहा था, उसे कैसे अचानक से कैसे गिरफ्ताकर कर लिया गया? सूत्रों से जानकारी मिली है कि इसमें भारतीय जांच एजेंसी ईडी, सीबीआई के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी बड़ा हाथ है. भारतीय जांच एजेंसियों को जब पता चला था कि चोकसी बेल्जियम में है, तभी से उसे भारत लाने की तैयारी चल रही थी. उसी समय सीबीआई-ईडी ने बेल्जियम सरकार से संपर्क साधा था.
सूत्र दावा करते हैं कि इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने बेल्जियम के राजा फिलिप के साथ बातचीत की. इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए बातचीत हुई थी. सूत्र दावा करते हैं कि इस दौरान पीएम मोदी की फिलिप के साथ मेहुल चोकसी को लेकर भी बातचीत हुई थी, तभी तय हो गया गया था कि भारत का गद्दार कम से कम बेल्जिमय में तो नहीं छुप सकता है.