डीप स्टेट ने नॉर्व में रची बड़ी साजिश, छोटा मुल्क, बड़ी बातें, प्रेस की आजादी वाला देश कैसे बना नॉर्वे, अब खुल गई पूरी कहानी

Global Bharat 20 May 2026 02:28: PM 2 Mins
डीप स्टेट ने नॉर्व में रची बड़ी साजिश, छोटा मुल्क, बड़ी बातें, प्रेस की आजादी वाला देश कैसे बना नॉर्वे, अब खुल गई पूरी कहानी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान एक महिला पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल और उसके बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस ने अब नया राजनीतिक रूप ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हाजिरजवाबी और कूटनीतिक शैली की भी चर्चा होने लगी है।

एक वक्त था जब अटल बिहारी वाजपेयी ने नरेन्द्र मोदी को राजधर्म का पाठ पढ़ाया था, मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो उसका बखूबी पालन करते भी दिखे, उनके कई तरीके बदलते नजर आए, लेकिन पीएम मोदी ने लगता है हाजिरजवाबी वाली बात अटल बिहारी वाजपेयी से नहीं सीखी, वरना नॉर्वे में जो हुआ, वो शायद न होता.....ऐसे दावे क्यों किए जा रहे हैं, इसे समझने के लिए 2 दशक पीछे चलना होगा...


साल था 1999 का....पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने के लिए तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान के दौरे पर जाते हैं, जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक महिला पत्रकार ने कहा
- "मैं आपसे शादी करना चाहती हूं, लेकिन शर्त ये है कि मुंह दिखाई में कश्मीर चाहिए"

जवाब में अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं मुझे शादी करने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन दहेज में मुझे पूरा पाकिस्तान चाहिए....ये वाजपेयी की वो हाजिरजवाबी थी, जिसके चर्चे आज भी होते हैं...दोनों जगह के हालात लगभग एक जैसे थे, वाजपेयी जी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में थे, और पीएम मोदी भी नॉर्वे के पीएम के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही मौजूद थे, बस अंतर इतना था कि मोदी संयुक्त बयान जारी करने पहुंचे थे, जहां आम तौर पर सवाल नहीं पूछे जाते...फिर भी एक महिला पत्रकार ने सवाल पूछा, जब ट्रोल हुईं तो कहने लगीं मैं विदेशी जासूस नहीं हूं, पर पूर्व RAW एजेंट लकी बिष्ट ने जो खुलासा किया है, वो हैरान करने वाला है... वो अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखते हैं...

"पत्रकार हेले लिंग स्वेंडसन नॉर्वे की नागरिक हैं, नॉर्वे नाटो का संस्थापक देश है. रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत ने पश्चिमी देशों और नाटो के दबाव में आने से साफ मना कर दिया था, तब से नाटो समर्थित ताकतें पीछे पड़ी हैं. ये महिला पत्रकार अमेरिका में भी रिपोर्टिंग कर चुकी हैं, तब इनका ठिकाना नॉर्थ कैरोलिना था, जहां CIA का सबसे बड़ा स्पेशल ऑपरेशन कमांड बेस बना है. ऐसे में ये सिर्फ सवाल नहीं बल्कि पश्चिमी देशों का भारत के खिलाफ चलाया गया अंतर्राष्ट्रीय ऑपरेशन (सूचना युद्ध) है."

अब नॉर्वे दौरे के दौरान पीएम मोदी के साथ हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस की तुलना उसी घटना से की जा रही है। नॉर्वे में संयुक्त बयान के दौरान एक महिला पत्रकार ने प्रेस स्वतंत्रता और भारत में मीडिया को लेकर सवाल उठाया। बाद में सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई।

कुछ पूर्व अधिकारियों और राजनीतिक विश्लेषकों ने दावा किया कि यह सिर्फ सामान्य पत्रकारिता नहीं बल्कि भारत की वैश्विक छवि को लेकर चल रही वैचारिक लड़ाई का हिस्सा हो सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस बीच नॉर्वे की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग और भारत की रैंकिंग को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने अंतरराष्ट्रीय प्रेस इंडेक्स की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, जबकि दूसरी तरफ प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी की चुप्पी को भी उनकी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं विपक्ष और समर्थकों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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