तेहरान: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा (फ्यूनरल) में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई शायद सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं होंगे. सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक रूप से आने की अनुमति नहीं दी जा रही है. ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत प्रतिनिधि आयतुल्लाह हकीम एलाही ने मीडिया को विशेष साक्षात्कार में यह जानकारी दी.
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से तेहरान रवाना होने से पहले उन्होंने बताया, ''मैं पिछले हफ्ते ईरान में था. मेरे कुछ दोस्तों ने मोहताबा से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि वह बाहर आना चाहते हैं, लोगों से मिलना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उन्हें आने की अनुमति नहीं दे रही हैं. यह बहुत खतरनाक है और हम उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते.''
क्यों है सुरक्षा का खतरा?
ईरान और इजरायल के बीच तनाव अभी भी बहुत अधिक है. हाल ही में हुए ईरान-इजरायल संघर्ष में अमेरिका-इजरायल हमलों में खामेनेई की मौत हुई थी. ऐसे में ईरानी अधिकारियों को आशंका है कि अंतिम यात्रा के दौरान कोई बड़ा सुरक्षा खतरा हो सकता है. ईरान में दिवंगत सुप्रीम लीडर के लिए कई दिनों तक भव्य अंतिम संस्कार समारोह चल रहे हैं. पूरे देश में शोक की लहर है. लोग खामेनेई को “आत्मा और आत्मा” का नुकसान मान रहे हैं, जिसकी कोई भरपाई नहीं हो सकती.
भारत का प्रतिनिधित्व
ईरान ने भारत कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. सलमान खुर्शीद खड़गे की ओर से शोक संदेश लेकर तेहरान जा रहे हैं. खुर्शीद ने कहा कि भारत-ईरान के पुराने संबंधों को देखते हुए मुश्किल वक्त में साथ खड़ा होना हमारा कर्तव्य है. यह घटनाक्रम ईरान में नेतृत्व परिवर्तन और क्षेत्रीय तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है.