आगे-आगे सांसद, पीछे-पीछे पुलिस, मेरठ में पीड़ित परिवार से मिलने जाते सांसद चंद्रशेखर सड़क पर क्यों दौड़ने लगे?

Amanat Ansari 11 Jan 2026 04:18: PM 1 Mins
आगे-आगे सांसद, पीछे-पीछे पुलिस, मेरठ में पीड़ित परिवार से मिलने जाते सांसद चंद्रशेखर सड़क पर क्यों दौड़ने लगे?

लखनऊ: नगीना से सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद का हाईवे पर भागते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि  उत्तर प्रदेश पुलिस ने चंद्रशेखर को तब दौड़ाया, जब वे मेरठ के कपसाड़ (कपसाढ़) गांव में एक दलित महिला की हत्या और उनकी बेटी के अपहरण के मामले में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे.

दरअसल, मेरठ के कपसाड़ गांव में 8 जनवरी को एक दलित महिला की हत्या कर दी गई थी, जबकि उनकी 22 वर्षीय बेटी का अपहरण कर लिया गया था. महिला ने बेटी को बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवाई. इस घटना से इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और जातीय तनाव बढ़ गया. आरोपी की तलाश में पुलिस अलर्ट थी, लेकिन राजनीतिक दलों ने भी इस मामले को उठाया.

चंद्रशेखर आजाद दिल्ली से मेरठ की ओर निकले. गाजीपुर बॉर्डर (गाजियाबाद) पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने भारी बल तैनात कर उन्हें रोक लिया. पुलिस का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित भीड़-भाड़ व तनाव को देखते हुए उन्हें आगे जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

रोके जाने पर चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस से तीखी बहस की. उन्होंने कहा, "मैं चुना हुआ सांसद हूं, मुझे धक्का दे रहे हो... हाथ मत लगाना!" इसके बाद उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, समर्थकों की भीड़ के साथ आगे बढ़े, डिवाइडर फांदकर हाईवे पर दौड़ लगाई. वीडियो में साफ दिख रहा है कि आगे-आगे चंद्रशेखर आजाद दौड़ रहे थे, और पीछे-पीछे पुलिस बल दौड़ता नजर आया. उन्होंने करीब 10 किलोमीटर तक पैदल/दौड़कर और बाद में बाइक पर सवार होकर पुलिस को चकमा दिया.

विभिन्न टोल प्लाजा (काशी टोल, सिवाया टोल आदि) पर भी उन्हें रोका गया, जहां धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ. कई जगहों पर पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे पीड़ित परिवार तक पहुंचने की जिद पर अड़े रहे. बाद में आरोपी को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया गया और अपहृत युवती को सुरक्षित बरामद कर लिया गया.

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