मायावती के कारण मोहन यादव का बढ़ा कद, मध्य प्रदेश में चौंका देने वाली रिपोर्ट आई सामने

Global Bharat 06 Jun 2024 03:11: PM 2 Mins
मायावती के कारण मोहन यादव का बढ़ा कद, मध्य प्रदेश में चौंका देने वाली रिपोर्ट आई सामने

बीजेपी के वोट शेयर में भारी कमी आई है लेकिन मध्य प्रदेश में बीजेपी का वोट शेयर बढ़ गया है. जिसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या मोहन यादव में योगी से ज्यादा जादू है या फिर हाथी ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस का पंजा तोड़ दिया? आंकड़े हैरान करने वाले हैं. बीजेपी ने इतिहास रचते हुए लोकसभा की सारी 29 सीटें जीत लीं. राज्य में बीजेपी के वोट 1.3 फीसदी बढ़े हैं, जबकि कांग्रेस के मतों का प्रतिशत 2.1 फीसदी घट गया है.

दिलचस्प ये है कि बहुजन समाज पार्टी जिसकी इस बार संसद में नुमाइंदगी ही नहीं होगी उसने लगभग 1% ज्यादा मत हासिल कर कम से कम 2 सीटों पर बीजेपी-कांग्रेस के बीच हार की खाई को पाट दिया. मध्यप्रदेश की 29 में 21 सीटों पर बीएसपी का उम्मीदवार तीसरे नंबर पर रहा. यानी मायावती के हाथी ने हाथ को कई सीटों पर नुकसान पहुंचाया है. पहले आंकड़ों के जरिए जान लेते हैं कि मध्यप्रदेश में किस पार्टी को कितने वोट मिले.

बता दें कि UP में मायावती का वोट सपा की तरफ गया, जबकि बीजेपी का अपना वोट भी छिटक गया. मायावती कभी किंगमेकर हुआ करती थी लेकिन इत्तेफाक की पार्टी के पास सांसद नहीं बचा है. UP की लोकसभा में पार्टी शून्य पर आ गई और विधानसभा में सिर्फ एक विधायक ही बचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि मायावती का वोट अगर ट्रांसफर ना होता तो फिर बीजेपी की कम से कम 30 सीटें बढ़ जाती.

राजस्थान के कई सीटों पर भी ऐसा हुआ है, जहां BSP उम्मीदवार खड़े थे लेकिन जीत हासिल नहीं हुई. UP में तो जब चार लाख वोटों की गलती हो गई थी तब तक ज्यादातर सीटों पर BSP उम्मीदवारों को पांच हज़ार वोट तक नहीं मिले थे, तो क्या यही कारण है कि मायावती की पार्टी लगभग सियासत से ख़त्म होने वाली है. मोहन यादव की जीत के पीछे मायावती का हाथ माना जा रहा है. मध्य प्रदेश में बसपा कहीं नहीं है लेकिन ज्यादातर सीटों पर वोट काटने का काम किया.

मध्य प्रदेश में बीजेपी 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिला है. ये वोट मोदी ने देश भर से मिलने की उम्मीद की थी, लेकिन मध्य प्रदेश के अलावा कही नहीं मिला. कांग्रेस 15 फीसदी वोटों से पिछड़ी है, तो वहां ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी का सपना सिर्फ MP में पूरा हुआ बाकी जगहों के हिन्दुओं ने दरकिनार क्यों कर दिया. बीजेपी उन सीटों को भी हार गई हैं जहां मुस्लिम आबादी 10 से 20 फीसदी ही थी. फिर सवाल उठता है हिन्दुओं ने क्या राम मंदिर का मुद्दा ठुकरा दिया था, या कांग्रेस मुसलमानों को एक करने में कामयाब रही लेकिन बीजेपी हिन्दुओं को एक करने में नाकाम रही. 

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