नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश में पड़ता है श्री सत्य साई जिला, जहां इस समय कोहराम मचा हुआ है, क्योंकि बॉर्डर के उस पार से पाकिस्तानी गोलियों का शिकार इसी जिले के मुदवथ मुरली नाइक बने हैं. मुरली अपने घर के इकलौते बेटे थे. जो अब भारत-पाकिस्तान जंग में वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं. लेकिन अकेले बेटे को खोलने के बाद परिवार का बुरा हाल है. मुरली के पिता श्रीराम नाइक कहते हैं कि वो हमारा इकलौता बेटा था, जिसने देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राण गंवा दिये, हमें उस पर गर्व है, लेकिन दुख इस बात का है कि वो हमें बेसहारा छोड़ गया. हमारे बुढ़ापे का केवल वही इकलौता सहारा था, जिसे नीच पाकिस्तान ने हमसे छीन लिया है. अब हम किसके सहारे जियेंगे. इन शब्दों को बोलते हुए सिर्फ श्रीराम नाइक ही नहीं बल्कि वहां मौजूद हर इंसान की आंखों से आंसू आने लगे.
अग्निवीर योजना के तहत हुए थे भर्ती
शहीद मुरली नाइक भारतीय सेना में 2022 में अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए थे. जिसके बाद नासिक में इनकी ट्रेनिंग हुई. 23 वर्षीय मुरली नाइक को इंडियन आर्मी की उत्तरी कमान की 851 लाइट रेजिमेंट में पोस्टिंग मिली थी. ट्रेनिंग के बाद लगभग एक साल तक उन्होंने असम में ड्यूटी की थी. जिसके बाद उन्हें 6 महीने के लिए जम्मू भेजा गया था. आखिरी बार मुरली जनवरी 2025 में 15 दिनों के लिए छुट्टी पर आए थे. 20 जनवरी को ड्यूटी पर वापस जाने के बाद शुक्रवार को उनके शहीद होने की खबर घरवालों को मिली है. शहीद के पिता का कहना है कि उनकी पत्नी को शुक्रवार सुबह 9 बजे के करीब सेना से फोन आया, उन्होंने पूछा कि आप मुरली नाइक की कौन हैं, जब उन्होंने बताया कि मैं मुरली की मां हूं तो फोन पर अधिकारी ने कहा कि फोन अपने पति को दो दीजिए. जिसके बाद उन्होंने मुझे बताया कि बेटा शहीद हो गया है
खबर मिलते ही कांप गए श्रीराम नाइक
श्रीराम नाइक का कहना है कि बेटे के शहीद होने की खबर सुनते ही मेरा पूरा शरीर सुन्न पड़ गया, हाथ-पैर कांपने लगे, गला सूखने लगा, मैं जहां था वहीं बैठ गया. जब मैंने अपनी पत्नी को बताया तो उसकी भी चीख निकल गई. हमारा बेट देश के लिए शहीद हुआ है, उसने देश के लिए लड़ाई लड़ी है, लेकिन हम बेसहारा रह गए हैं. अब जो भी समाधान होगा मैं उसे देश पर छोड़ता हूं, अब हर निर्णय देश को ही लेना है.