नई दिल्ली : देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि इंफोसिस के सह-संस्थापक और देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई-पावर टास्क फोर्स बनाई गई है। यह समिति सार्वजनिक परीक्षाओं में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और व्यापक परीक्षा सुधारों पर सरकार को सुझाव देगी.
नंदन नीलेकणी भारत के उन चुनिंदा तकनीकी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं, जिन्होंने देश की डिजिटल पहचान और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी. 1981 में उन्होंने इंफोसिस की सह-स्थापना की और बाद में कंपनी के सीईओ भी रहे. वर्ष 2009 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष बनाया. उनके नेतृत्व में आधार परियोजना को आकार मिला, जिसने करोड़ों भारतीयों को एक डिजिटल पहचान उपलब्ध कराई.
भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को विकसित करने में भी नीलेकणी की अहम भूमिका मानी जाती है. आधार, डिजिटल पहचान और ओपन डिजिटल नेटवर्क जैसे विचारों को आगे बढ़ाने में उनका योगदान रहा. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम को आकार देने वाले प्रमुख विचारकों में भी उनका नाम लिया जाता है. हाल के वर्षों में उन्होंने एनर्जी ग्रिड की अवधारणा भी सामने रखी है, जिसमें उपभोक्ता स्वयं बिजली बनाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खरीद-बिक्री कर सकेंगे.
नीलेकणी वर्तमान में भारत के अग्रणी आर्थिक शोध संस्थान एनसीएईआर के गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष हैं. वे एक प्रसिद्ध निवेशक, लेखक और परोपकारी भी हैं. 2014 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन जीत नहीं सके. इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली और तकनीक एवं सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में काम जारी रखा.
अब परीक्षा सुधार की कमान मिलने के बाद उनकी अगुवाई वाली टास्क फोर्स से उम्मीद की जा रही है कि वह ऐसी तकनीकी व्यवस्था सुझाएगी, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके और देश की परीक्षा प्रणाली अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित तथा पारदर्शी बन सके.