न कपिल सिब्बल की दलील चली, न प्रशांत भूषण की, CJI ने SIR पर रुख किया साफ

Amanat Ansari 27 Nov 2025 11:42: PM 2 Mins
न कपिल सिब्बल की दलील चली, न प्रशांत भूषण की, CJI ने SIR पर रुख किया साफ

CJI on SIR: क्या किसी विदेशी के पास आधार कार्ड है तो उसे भारत में वोट देने का अधिकार मिल जाएगा ? बिहार में एसआईआर से पहले तमाम सवाल उठाए गए, पर एसआईआर के बाद भी एक भी वोटर अपनी याचिका लेकर क्यों नहीं आया कि हमारा नाम गलत तरीके से काटा गया, ये सवाल सुप्रीम कोर्ट ने जब SIR के खिलाफ दलील रखने वाले वकीलों से पूछा तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था...आरजेडी की ओर से पक्ष रख रहे थे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, जबकि ADR की ओर से पक्ष रख रहे थे वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण...और सामने बैठी थी सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच....

कपिल सिब्बल ने कहा- ''इस मामले में कोर्ट जो भी फैसला करेगा, वह "भारत में लोकतंत्र की किस्मत" तय करेगा. ये प्रक्रिया असंवैधानिक है, वोटर्स पर कागजी प्रक्रियाओं का बोझ डालता है.''

जस्टिस बागची बोले- ''इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया के पास रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 के सेक्शन 21(3) के तहत इलेक्टोरल रोल का स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) करने की पावर है.''

कपिल सिब्बल की दलील- ''हम चुनाव आयोग की शक्तियों पर सवाल नहीं उठा रहे, बल्कि प्रोसेस के सही होने को चुनौती दे रहे हैं. नागरिकता तय करना BLO के बस की बात नहीं है.''

जस्टिस बागची- ''BLO सिटिज़नशिप तय नहीं कर रहे, बल्कि जन्म की तारीख और जगह जैसे बेसिक फैक्ट्स को वेरिफ़ाई कर रहे हैं.''

CJI सूर्यकांत- ''अगर घुसपैठियों आधार कार्ड हासिल कर लें तो क्या उन्हें वोट देने की इजाज़त दी जानी चाहिए? आधार नागरिकता का सबूत नहीं हो सकता.''

सीजेआई के इस सवाल का ठोस जवाब किसी के पास नहीं था, आखिर कोई घुसपैठिया जो यहां मजदूरी कर रहा है, या गलत तरीके से आधार हासिल कर रहा, उसने गलत तरीके से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा लिया है, तो उसे हटाने में क्या हर्ज है...क्या ये विपक्षी पार्टियों का वोटबैंक है, ये सवाल लंबे वक्त से उठ रहे हैं...आखिर लखनऊ में सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर क्यों चढ़े हैं, उन्हें एसआईआर से दिक्कत क्यों हो रही है, राहुल गांधी ये क्यों पोस्ट कर रहे हैं कि एसआईआर के जरिए बीजेपी अपने मनमाफिक वोटर लिस्ट बनवाना चाहती है.

यहां तक कि अखिलेश यादव 3 करोड़ वोटर के नाम काटे जाने का दावा कर रहे हैं, जैसे बिहार चुनाव के वक्त करीब 25 लाख वोटर्स के नाम हटाए जाने का दावा हुआ था, पर सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही पूछा कि हमने पैरालीगल वॉलंटियर्स को भेजा फिर भी कोई शिकायत करने क्यों नहीं आया तो विपक्ष के विरोध की पोल खुल गई...

ये बात पब्लिक भी जानती है, शायद यही वजह है कि वाराणसी में मुस्लिम महिलाएं एसआईआर को लेकर जागरुकता अभियान चला रही हैं. तो क्या असल सच्चाई ये है कि विरोध के बहाने गलत नामों को विपक्षी वोटर लिस्ट में रखे रहना चाहती है...एक तरफ राहुल का वोट चोरी का मुद्दा तो दूसरी तरफ वोटर लिस्ट शुद्धिकरण पर सवाल कई सवालों को जन्म देता है...

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर को सुनवाई की अगली तारीख तय की है...उससे पहले तमिलनाडु की याचिका पर चुनाव आयोग को 1 दिसंबर तक जवाब देना होगा. केरल की याचिका पर 2 दिसंबर को सुनवाई होगी, और बंगाल से जुड़े मामले 9 दिसंबर को सुने जाएंगे. उसके बाद इन तीन राज्यों में एसआईआर पर सुप्रीम फैसला आ सकता है..

इन तीनों के अलावा असम में अलग प्रोसेस को लेकर भी प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए हैं...तय सुप्रीम कोर्ट को करना है कि चुनाव आयोग ने जो कहा कि राजनीतिक पार्टियां बेवजह डर का माहौल बना रही हैं, वो दलील सही है या फिर विपक्षी पार्टियों की चिंता जायज है...क्योंकि देश में कई बीएलओ की मौत को भी एसआईआर से जोड़ा जाने लगा है.

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