काठमांडू: नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की आपदा के बीच काठमांडू सरकार ने भारत, चीन समेत कई देशों की विशेष खोज-बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू) टीमें भेजने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. नेपाल का कहना है कि उसके अपने सुरक्षा बल इस ऑपरेशन को संभालने में सक्षम हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सहायता और राहत सामग्री स्वीकार करने से इनकार नहीं किया गया है.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया कि देश ने मित्र देशों या अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद पूरी तरह नहीं ठुकराई है. उन्होंने कहा कि जहां अतिरिक्त तकनीकी क्षमता की जरूरत होगी, वहां सहयोग लिया जाएगा. खासकर सुरंगों या जटिल संरचनाओं वाले इलाकों में तकनीकी विशेषज्ञता मांगी जा सकती है.
2015 के भूकंप का सबक
इस फैसले के पीछे 2015 के विनाशकारी भूकंप का अनुभव है. उस समय बड़ी संख्या में विदेशी रेस्क्यू टीमें आने से समन्वय और प्रबंधन में कई समस्याएं पैदा हुई थीं. कई देशों की टीमें एक साथ मैदान में उतरने से कमांड चेन ओवरलैप हो गई थी और लॉजिस्टिक्स संबंधी दिक्कतें आई थीं. इस बार नेपाली सेना और पुलिस की सिफारिश पर सरकार ने केंद्रीकृत तरीके से ऑपरेशन चलाने का फैसला लिया है.
टीमें नहीं, लेकिन मदद हां
नेपाल ने विदेशी सरकारों से वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री राहत कोष के जरिए एक ही चैनल से भेजने को कहा है. पुनर्निर्माण के चरण में अतिरिक्त वित्तीय और अन्य सहायता मांगी जाएगी. विदेश मंत्रालय ने एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ERT) भी गठित की है, जो बाढ़ प्रभावित विदेशी नागरिकों की खोज, बचाव, जानकारी सत्यापन और कांसुलर सहायता का काम करेगी.
भारत और चीन ने दी थी मदद की पेशकश
भारत ने नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमें और उपकरण भेजने की पेशकश की थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि नेपाल सरकार के जवाब का इंतजार है. भारत पहले ही 47.5 टन से ज्यादा राहत सामग्री (दवाएं और खाद्य पैकेट) भेज चुका है. साथ ही बेली ब्रिज और प्रीफैब ट्रस ब्रिज भी उपलब्ध कराने की पेशकश की गई है.
चीन और कई अन्य देशों ने भी रेस्क्यू टीमें भेजने की इच्छा जताई थी, जिन्हें नेपाल ने अस्वीकार कर दिया. अमेरिका, ब्रिटेन और विश्व बैंक ने वित्तीय सहायता की घोषणा की है, जबकि एशियाई विकास बैंक ने दीर्घकालिक सहायता का प्रस्ताव रखा है.
बाढ़ में सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत, चीन, अमेरिका, मलेशिया, यूक्रेन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा समेत कई देशों के नागरिक शामिल हैं. नेपाल इस बार विदेशी टीमें मैदान में उतारने के बजाय अपने नियंत्रण में ऑपरेशन चलाते हुए बाहरी सहायता लेने का रास्ता अपना रहा है.