नई दिल्ली: मुंबई की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने 2008 के मालेगांव बम धमाका मामले में शनिवार को अंतिम दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह धमाका 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास हुआ था, जो मुंबई से लगभग 200 किमी दूर है. इस हमले में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे.
जांच का सफर
इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने की थी. बाद में 2011 में यह मामला NIA को सौंप दिया गया. अभियोजन पक्ष ने 1,389 पेज की लिखित दलीलें पेश कीं, जिसमें सातों आरोपियों के लिए सजा की मांग की गई.
मुख्य आरोपी और दलीलें
सात आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (पूर्व बीजेपी सांसद), मेजर रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय रहिरकर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर धर द्विवेदी और सुधाकर ओंकारनाथ चतुर्वेदी शामिल हैं. NIA ने साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी रिहाई की अर्जी खारिज कर दी, और वह अन्य आरोपियों के साथ मुकदमे में शामिल रहीं.
बचाव पक्ष की दलील
साध्वी प्रज्ञा के वकील ने दावा किया कि यह धमाका प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) द्वारा किया गया हो सकता है. अन्य आरोपियों ने भी लिखित दलीलें दाखिल कीं, जिसमें अभियोजन पक्ष के दावों को चुनौती दी गई. कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. जल्द ही इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया जा सकता है.