लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी के भीतर सियासी खींचतान के संकेत सामने आए हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने अपनी ही पार्टी के चार विधायकों को लेकर नाराजगी जाहिर की है. उनका आरोप है कि कुछ विधायक पार्टी का झंडा-बैनर लगाने से बचते हैं और पार्टी की बैठकों में भी शामिल नहीं होते.
संजय निषाद के मुताबिक, मेरी पार्टी के कुछ विधायकों को अपना झंडा-बैनर लगाने में शर्म आती है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे नेताओं को 2027 में दोबारा टिकट देने से पहले पार्टी गंभीरता से विचार करेगी.
जिन चार विधायकों का नाम सामने आया है, उनमें संत कबीर नगर की मेंहदावल सीट से अनिल कुमार त्रिपाठी, महराजगंज की नौतनवा से ऋषि त्रिपाठी, कुशीनगर की खड्डा सीट से विवेकानंद पांडेय और जौनपुर की शाहगंज सीट से रमेश सिंह शामिल हैं.
मामले की खास बात यह है कि इन विधायकों के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें नजर आती हैं, जबकि निषाद पार्टी का नाम और झंडा प्रमुखता से दिखाई नहीं देता. यही बात पार्टी नेतृत्व की नाराजगी की बड़ी वजह बनी है.
2022 के विधानसभा चुनाव में BJP और निषाद पार्टी गठबंधन के तहत निषाद पार्टी को 16 सीटें मिली थीं. इनमें 10 सीटों पर पार्टी के सिंबल से उम्मीदवार उतरे और 6 पर जीत मिली. वहीं 6 उम्मीदवार BJP के कमल निशान पर मैदान में उतरे थे, जिनमें 5 ने जीत दर्ज की थी.
अब 2027 से पहले संजय निषाद का यह रुख गठबंधन के भीतर संगठन, टिकट और विधायकों की राजनीतिक निष्ठा को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है. खासतौर पर यह देखना अहम होगा कि इन चारों विधायकों को आगामी चुनाव में निषाद पार्टी दोबारा मौका देती है या नहीं.