नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 (20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे डीपफेक वीडियो और अपमानजनक पोस्ट्स के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है. सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस अभय आहूजा ने गडकरी को सिविल सूट दायर करने की अनुमति दे दी. गडकरी ने अदालत में कहा कि कुछ अज्ञात लोगों ने सोशल मीडिया पर उनके नाम से फर्जी वीडियो और पोस्ट्स वायरल किए हैं.
इनमें दावा किया जा रहा है कि E20 प्रोग्राम उनके व्यक्तिगत फैसले का नतीजा है और उनसे जुड़े लोग इस कार्यक्रम से आर्थिक लाभ उठा रहे हैं. मंत्री का कहना है कि ये आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक हैं. इनसे उनकी प्रतिष्ठा, सम्मान और सार्वजनिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है. सूट में AI से बने डीपफेक वीडियो, रील्स और फर्जी ऑडियो-वीडियो सामग्री पर रोक लगाने की मांग की गई है.
सूट में कौन-कौन शामिल?
गडकरी ने स्पष्ट किया है कि वे वैध आलोचना या ईमानदार बहस को नहीं रोकना चाहते. उनका लक्ष्य केवल झूठे और मानहानिकारक कंटेंट पर अंकुश लगाना है. E20 पेट्रोल में 20% एथनॉल और 80% पेट्रोल होता है. सरकार का लक्ष्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और स्वदेशी बायोफ्यूल को बढ़ावा देना है.
इस कार्यक्रम की देखरेख पेट्रोलियम मंत्रालय करती है, न कि गडकरी व्यक्तिगत रूप से. कोर्ट ने गडकरी को मूल सिविल सूट दायर करने की अनुमति दे दी है. यह मामला सोशल मीडिया पर डीपफेक और फेक न्यूज के बढ़ते खतरे को उजागर करता है.