ऑपरेशन सिंदूर: मणिपुर के रिजवान मलिक ने दुश्मन की सुरक्षा भेदी, पाक आतंकी कैंप उड़ाए

Amanat Ansari 07 May 2026 07:34: PM 4 Mins
ऑपरेशन सिंदूर: मणिपुर के रिजवान मलिक ने दुश्मन की सुरक्षा भेदी, पाक आतंकी कैंप उड़ाए

Operation Sindoor Anniversary: रात अंधेरी और खतरों से भरी थी. लेकिन उनका सुखोई जेट मिशन के लिए पूरी तरह लोडेड था, और यही मायने रखता था. आसमान में ड्रोन स्वार्म छाए हुए थे और नीचे घातक एयर डिफेंस. हर एक, यहां तक कि सबसे एडवांस्ड जेट्स के लिए भी लगभग निश्चित मौत का परवाना. लेकिन भारतीय वायुसेना (IAF) के स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक ने बिना हिचक आगे बढ़ते रहे. वे बिना किसी एस्कॉर्ट के खतरे के दिल में घुस गए, मौत के जाल को चीरते हुए पाकिस्तानी आतंकी कैंपों पर सटीक मिसाइल हमला किया.

युद्ध के नायक शायद ही कभी रियल टाइम में सामने आते हैं. उनकी कहानियां अक्सर टुकड़ों में उभरती हैं. कुछ तो गैलेंट्री साइटेशन्स में ही सामने आती हैं. स्क्वाड्रन लीडर मलिक की कहानी भी ऐसी ही है. और इसे ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर याद करना बिल्कुल उचित है. पाकिस्तान की भारी सुरक्षा वाले टारगेट्स पर एक साल पहले मध्यरात्रि सॉर्टी के दौरान, स्क्वाड्रन लीडर मलिक का सुखोई Su-30MKI रडार लॉक और आने वाली आग के बीच आगे बढ़ता रहा. यह कार्रवाई मिशन और मणिपुर के इस फाइटर पायलट दोनों को परिभाषित कर गई.

पहलगाम हमले के कुछ हफ्तों बाद, जिसमें पाकिस्तानी आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के बैसरन घाटी में 26 आम नागरिकों की हत्या कर दी थी, 7 मई को बदला लेने का समय आया और ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया. इस ऑपरेशन में IAF और अन्य सैन्य संपत्तियों ने पाकिस्तान-आतंकवाद से जुड़े आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. ये हमले जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे समूहों से जुड़े आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर किए गए थे. हमले फोकस्ड, मापा हुआ और गैर-वृद्धिकारी थे, जिनका मकसद आतंकी नेटवर्क को तोड़ना था, न कि नागरिकों या व्यापक सैन्य ठिकानों को.

मलिक उन नायकों में शामिल थे जिन्होंने बदला लिया. उन्हें 15 अगस्त 2025 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया. आइए जानते हैं भारत के पूर्वोत्तर से आए इस नायक की यात्रा और वे ऑपरेशन सिंदूर के नायकों में कैसे उभरे.

मणिपुर से सुखोई कॉकपिट तक मलिक की यात्रा

मलिक की शुरुआत मणिपुर के इम्फाल पूर्व जिले के केइखू गांव से हुई. वे एक मैतई पांगाल परिवार में पैदा हुए. उनके पिता अल्हाज हाफिजुद्दीन सेवानिवृत्त बागवानी अधिकारी हैं. मलिक की प्रारंभिक शिक्षा के बारे में सार्वजनिक रिकॉर्ड्स में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि बचपन से ही वे बेहद महत्वाकांक्षी और अनुशासित थे. इन्हीं गुणों के कारण वे करीब दस साल पहले, 2015 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए. वे 195वें फ्लाइंग कोर्स के सदस्य थे. वे रैंकों में तरक्की करते गए और 2021 में स्क्वाड्रन लीडर बन गए.

लेकिन स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक फाइटर पायलट्स में भी अलग पहचान रखते थे. वे डीप-स्ट्राइक मिशन्स और एयर सुपीरियॉरिटी ऑपरेशन्स के विशेषज्ञ थे. उन्होंने उन परिस्थितियों में ट्रेनिंग ली थी जहां सटीकता, गति और बेहद दबाव में शांति की जरूरत पड़ती है. और ऑपरेशन सिंदूर में उन्होंने अपने मेटल साबित किया.

ऑपरेशन सिंदूर की वो सॉर्टी जिसने रिजवान मलिक को परिभाषित किया

ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के अंदर JeM और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नौ आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया, जो पश्चिमी मोर्चे पर फैले हुए थे. ये जगहें पाकिस्तानी सेना द्वारा भारी सुरक्षा में थीं, जो लंबे समय से इन समूहों के साथ मिलकर काम करती आई है. मलिक को इन टारगेट्स को नष्ट करने का काम सौंपा गया था, हालांकि मिशन के सटीक विवरण अभी भी वर्गीकृत हैं.

भारत सरकार के आधिकारिक साइटेशन के अनुसार, रिजवान मलिक मध्यरात्रि सॉर्टी में अनएस्कॉर्टेड स्ट्राइक पैकेज के डिप्टी मिशन लीडर के रूप में उड़े. पाकिस्तान के अंदर के टारगेट्स एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम और लगातार रडार निगरानी से सुरक्षित थे, जो पाक आर्मी के समर्थन से चल रहे थे.
हमला करने का समय बहुत कम था और खतरा लगातार बना रहा. उन्होंने अंधेरे में कम ऊंचाई पर जेट उड़ाया, दुश्मन के एयरस्पेस में नेविगेट किया, डिटेक्शन से बचते हुए हथियार छोड़ने के लिए खुद को अलाइन किया. भले ही कई हवाई और जमीन से आने वाले खतरे उन पर लॉक हो गए, उन्होंने अपना पहला हथियार दागा और पाकिस्तान में निर्धारित टारगेट को नष्ट कर दिया. दुश्मन की ओर से आसन्न खतरे के बावजूद वे पीछे नहीं हटे.

बल्कि उन्होंने दूसरा स्ट्राइक भी किया, हाई-रिस्क एंगेजमेंट जोन में काम करते हुए दूसरे टारगेट को भी सफलतापूर्वक नष्ट किया. इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स और लगातार खतरों के बावजूद उन्होंने ऑपरेशन के दौरान कई मिशन पूरे किए और सटीक हमले किए. साइटेशन में उनकी कार्रवाई को "उत्कृष्ट साहस, निर्णायक नेतृत्व और अटूट समर्पण" से चिह्नित बताया गया है. इसमें कहा गया कि उनकी आक्रामक मैन्यूवरिंग ने विरोधियों को "रणनीतिक अराजकता" में धकेल दिया. मलिक उन नौ भारतीय वायुसेना अधिकारियों में शामिल थे जिन्हें युद्धकालीन गैलेंट्री के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया.

जब मलिक की बहादुरी की खबर आई, तो उनके गृह राज्य मणिपुर में जश्न मनाया गया. राज्य के नेता और स्थानीय समुदायों ने उनके योगदान का सम्मान किया. ऑपरेशन सिंदूर की एक साल बाद, स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक की कहानी पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती है न सिर्फ एक पायलट के रूप में जो अपने टारगेट्स को भेदकर लौटा, बल्कि उस व्यक्ति के रूप में जो खतरे में घुसा और मिशन का रुख बदल दिया.

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