नई दिल्ली: 22 अप्रैल पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही टीमों ने एक GoPro एक्शन कैमरे को महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत के रूप में पहचाना है. इस हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था. हमले की जिम्मेदारी 'द रेसिस्टेंस फ्रंट' (TRF) ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है.
नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA), जो जांच का नेतृत्व कर रही है, ने GoPro Hero 12 Black मॉडल का एक कैमरा बरामद किया है, जिसका सीरियल नंबर C3501325471706 है. एजेंसी ने जम्मू की स्पेशल कोर्ट को बताया है कि यह डिवाइस आतंकी मॉड्यूल की पूर्व-हमला टोह लेने, आवाजाही के पैटर्न और ऑपरेशनल तैयारी से जुड़ी हुई मानी जा रही है.
NIA के अनुसार, यह कैमरा सबसे पहले 30 जनवरी 2024 को चीन के डोंगगुआन में एक्टिवेट हुआ था. जांचकर्ताओं द्वारा जारी नोटिस के जवाब में GoPro BV (निर्माता कंपनी) ने एजेंसी को सूचित किया कि यह डिवाइस चीन स्थित AE Group International Limited नामक डिस्ट्रीब्यूटर को सप्लाई की गई थी. हालांकि कंपनी ने कहा कि उसके पास इसके बाद की बिक्री या अंतिम उपयोगकर्ता की पहचान का कोई रिकॉर्ड नहीं है.
यह पता लगाने के लिए कि कैमरा किसने खरीदा, किसने इस्तेमाल किया और यह हमलावरों तक कैसे पहुंचा, NIA अब चीन की न्यायिक अथॉरिटी से मदद मांगने के लिए लेटर ऑफ रोगेटरी (औपचारिक न्यायिक सहायता अनुरोध) भेजेगी. गृह मंत्रालय ने इस अनुरोध को मंजूरी दे दी है और 2 मार्च को जम्मू की स्पेशल कोर्ट ने चीन की न्यायिक अथॉरिटी से सहायता मांगने की अनुमति दे दी.
चूंकि भारत और चीन के बीच कोई द्विपक्षीय म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) नहीं है, इसलिए यह अनुरोध संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (UNTOC) के प्रावधानों के तहत भेजा जाएगा, जिसे दोनों देशों ने रैटिफाई किया है.
कोर्ट ने माना कि कैमरे की चेन ऑफ कस्टडी, उपयोगकर्ता की पहचान और हमले के पीछे की व्यापक साजिश से सबूतों को जोड़ने के लिए यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह डिवाइस हमले की योजना और अमल को फिर से बनाने में निर्णायक साबित हो सकता है.