फतेहपुर: यूपी के फतेहपुर जिले में 200 साल पुराने मांगी मकबरे पर तोड़फोड़ और भगवा झंडा फहराने की घटना ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. इस मामले में पुलिस ने 10 नामजद और 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता पप्पू सिंह चौहान का नाम भी शामिल है. घटना के बाद सपा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चौहान को "पार्टी विरोधी गतिविधियों" के लिए निष्कासित कर दिया. निष्कासन के बाद चौहान का सोशल मीडिया पर दिया गया बयान तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपनी बात रखते हुए पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए.
पुलिस के अनुसार, मांगी मकबरे पर हिंदू संगठनों के एक समूह ने हंगामा किया और इसे मंदिर स्थल बताकर भगवा झंडे लहराए. इस समूह में पप्पू सिंह चौहान भी शामिल थे. मठ मंदिर संरक्षण संघर्ष समिति द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में मकबरे को "थाकुर द्वारा" मंदिर घोषित करने की मांग की गई. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी बल तैनात किया और अब मामले की गहन जांच कर रही है.
कौन है पप्पू सिंह चौहान?
50 वर्षीय पप्पू सिंह चौहान फतेहपुर के हुसैनगंज विधानसभा क्षेत्र के जमरांवा गांव के निवासी हैं. उन्होंने गांव में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और एमजी कॉलेज से स्नातक किया. 1997 में वे भारतीय सेना की इंजीनियर रेजिमेंट में भर्ती हुए और 22 साल की सेवा के बाद 2021 में सेवानिवृत्त होकर सपा में शामिल हुए. चार साल के राजनीतिक करियर के बाद, इस घटना ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
सोशल मीडिया पर वायरल बयान
निष्कासन के बाद पप्पू सिंह ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया, जो चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 2021 से सपा के लिए समर्पित होकर काम किया और पार्टी की स्थिति को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि फतेहपुर में सपा पर मुस्लिम समुदाय का वर्चस्व है और हिंदू नेताओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया जाता. उन्होंने कहा, "मैं सनातन धर्म के लिए हमेशा लड़ता रहूँगा." इस बयान ने सपा के भीतर और बाहर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं.
यह घटना फतेहपुर में सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने के साथ-साथ सपा के लिए आंतरिक चुनौती बन गई है. चौहान के बयान ने पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस मामले की जाँच में जुटी है. यह विवाद न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है.