नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) व छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आग अब संसद परिसर तक भड़क उठी है। संसद के मॉनसून सत्र के चौथे दिन स्थिति तब और बेकाबू हो गई जब सड़कों पर जारी सरकार और विपक्ष की जंग सीधे संसद भवन के मकर द्वार और मकर परिसर तक पहुँच गई। विपक्षी सांसदों और सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच जमकर नारेबाजी, धक्का-मुक्की और तीखी बहस देखने को मिली, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
मकर द्वार पर आमने-सामने आए सांसद
सदन शुरू होने से ठीक पहले, सुबह 10:30 बजे से ही कांग्रेस, सपा, टीएमसी और वामपंथी दलों के सांसद संसद परिसर में महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा के पास तख्तियां लेकर एकत्र हो गए।
विपक्षी सांसद "शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो" और "छात्रों पर लाठीचार्ज बंद करो" के नारे लगा रहे थे। इसी दौरान जब बीजेपी और एनडीए (NDA) के सांसद भी जवाब में पोस्टर लेकर मकर द्वार के पास पहुँचे, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते संसद परिसर किसी जनसभा और विरोध-स्थल में तब्दील हो गया।
खड़गे-राहुल का कड़ा रुख, सरकार का पलटवार
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक संसद को सामान्य रूप से नहीं चलने दिया जाएगा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है।
दूसरी ओर, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि सरकार NEET-UG मुद्दे पर नियम 267 या किसी भी तय प्रावधान के तहत चर्चा कराने को तैयार है। लेकिन विपक्ष सिर्फ संसद को ठप करके राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहता है।
सड़कों का गुस्सा जब संसद में गूंजा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले तीन दिनों से दिल्ली, लखनऊ और अन्य शहरों की गलियों में जो छात्र आक्रोश और धरना प्रदर्शन चल रहा था, विपक्ष ने उसे भुनाने के लिए संसद को अपना मुख्य मोर्चा बना लिया है। संसद परिसर में हुए इस भारी हंगामे के चलते आम जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और प्रश्नकाल की कार्यवाही पूरी तरह से बाधित रही।