अब प्यासा नहीं रहेगा बुंदेलखंड, महाकुंभ में भी दिखेगी ''स्वच्छ सुजल गांव'' की कहानी, ''नमामि गंगे'' का भी दिखेगा अद्भुत नजारा

Global Bharat 09 Jan 2025 03:37: PM 2 Mins
अब प्यासा नहीं रहेगा बुंदेलखंड, महाकुंभ में भी दिखेगी ''स्वच्छ सुजल गांव'' की कहानी, ''नमामि गंगे'' का भी दिखेगा अद्भुत नजारा

लखनऊ/महाकुंभ नगर: महाकुंभ में देश-विदेश से आने वाले 40-45 करोड़ श्रद्धालु यूपी के 'स्वच्छ सुजल गांव' की तस्वीर भी देखेंगे. पीएम मोदी के मार्गदर्शन व सीएम योगी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के जरिए बुंदेलखंड के गांव-गांव में हर घर जल पहुंचाने की नई तस्वीर से भी रूबरू होंगे. 2017 से पहले बदहाल और इसके बाद बदले बुंदेलखंड के बदलाव की गाथा भी दिखेगी. 40 हजार स्क्वायर फीट एरिया में बसे गांव में पीएम आवास, सीएम आवास, ग्राम पंचायत, सोलर एनर्जी के जरिए समृद्ध उत्तर प्रदेश की नई कहानी भी दिखेगी.

यह गाथा बदले यूपी की पहचान से हर श्रद्धालु को अवगत कराएगी. वहीं डिजिटल कॉर्नर में पहुंचकर उत्तर प्रदेश का हर नागरिक अपने गांव में जल, टैब, जलापूर्ति की वास्तविक स्थिति भी जान सकेगा. योगी सरकार के नेतृत्व में ग्रामीण जलापूर्ति व नमामि गंगे विभाग महाकुंभ -2025 में 'स्वच्छ सुजल गांव' बसा लिया है. इस गांव का दर्शन 10 जनवरी से 26 फरवरी तक होगा. 'पेयजल का समाधान, मेरे गांव की नई पहचान' थीम पर यह गांव 40 हजार स्क्वायर फीट एरिया में बसेगा.

CM योगी ने किया समस्या का समाधान

कभी प्यासे रहे बुंदेलखंड में पीएम मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पेयजल की समस्या का समाधान हो गया है. 47 दिन तक इस गांव में अलग-अलग कार्यक्रम भी होंगे. प्रदर्शनी में बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाओं को मंच मुहैया कराया जाएगा, जिसमें वे बदलाव की कहानी भी बयां करेंगी. बांदा, झांसी, चित्रकूट के कई गांवों में पानी न होने के कारण शादी नहीं हो पाती थी. ललितपुर व महोबा के उन गांवों की महिलाएं, पानी ढोने के कारण जिनके सिर से बाल गायब हो गए थे. शुद्ध पानी से जीवन में आए बदलाव की कहानी को वे बयां करेंगी.

पांच भाषाओं में दी जाएगी जानकारी

यहां हर जानकारी पांच भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, तेलुगु व मराठी) में मिलेगी. ग्रामीण जलापूर्ति व नमामि गंगे विभाग की तरफ से महाकुंभ में 'जल मंदिर' भी बनाया जाएगा. 'जल मंदिर' में भगवान शिव की जटा से गंगा धरती पर आएंगी. इसके जरिए संदेश दिया जाएगा कि जल प्रसाद है, जल जीवनदायी है. इसे बर्बाद न करें, बल्कि संरक्षण करें. 'जल मंदिर' में सुबह-शाम जल आरती भी होगी. इस आरती में जल जीवन मिशन की गाथा, जल संरक्षण का संदेश भी होगा.

जूट-कपड़े के बैग में मिलेगा 'जल प्रसाद'

'अतिथि देवो भवः' भारत की परंपरा है. स्वच्छ सुजल गांव में आने वाले अतिथियों का नमामि गंगे व ग्रामीण जलापूर्ति विभाग सम्मान भी करेगा. आगंतुकों को जूट-कपड़े के बैग में 'जल प्रसाद' भी दिया जाएगा. इसमें संगम का जल, जल जीवन मिशन की डायरी, सफलता/बदलाव की कहानी से जुड़ी अध्ययन सामग्री आदि भी रहेगी. इस गांव में डिजिटल स्क्रीन, डिजिटल गेमिंग जोन लॉन्च किया जाएगा. गेम जोन का हिस्सा बनकर लोग जानेंगे कि स्वच्छ पेयजल के फायदे और दूषित पेयजल के नुकसान क्या हैं. लोग खेल-खेल में डिजिटल रूप से जान सकेंगे कि जल संरक्षण क्यों जरूरी है. डिजिटल कॉर्नर में आए यूपी के ग्रामीण एक क्लिक में अपने गांव में पानी, टैब, जलापूर्ति आदि से जुड़ी जानकारी की वस्तुस्थिति से भी अवगत हो सकेंगे.

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