नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे. इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सऊदी अरब की दो दिवसीय यात्रा को बीच में ही समाप्त कर भारत लौटने का फैसला किया. विशेष रूप से, दिल्ली लौटते समय PM मोदी के विमान ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) का उपयोग नहीं किया, जो एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
पहलगाम आतंकी हमला और उसका संदर्भ
पहलगाम के बैसारन घास के मैदान में हुए इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली, जो पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का एक सहयोगी संगठन है. आतंकवादियों ने सैन्य-ग्रेड हथियारों और उन्नत संचार उपकरणों का इस्तेमाल किया, जो बाहरी समर्थन की ओर इशारा करता है. खुफिया सूत्रों के अनुसार, आतंकवादी किश्तवाड़ से कोकेरनाग के रास्ते बैसारन पहुंचे थे और उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से इलाके की टोह ली थी. यह हमला 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में सबसे घातक आतंकी घटनाओं में से एक है.
एयरस्पेस का बहिष्कार कर रुख किया स्पष्ट
PM मोदी सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निमंत्रण पर रणनीतिक साझेदारी परिषद की दूसरी बैठक में हिस्सा लेने गए थे. हमले की खबर मिलते ही उन्होंने अपनी यात्रा को छोटा किया और तुरंत भारत लौटने का निर्णय लिया. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, मंगलवार को जेद्दा जाते समय PM का विमान, भारतीय वायुसेना का बोइंग 777-300 (K7067), पाकिस्तानी एयरस्पेस से होकर गुजरा था, जो खाड़ी देशों के लिए सबसे छोटा और सामान्य मार्ग है. हालांकि, बुधवार को दिल्ली लौटते समय विमान ने अरब सागर के ऊपर से लंबा मार्ग चुना, जो पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से बायपास करता है. यह विमान ओमान के हवाई क्षेत्र और अरब सागर के रास्ते गुजरात में भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर दिल्ली पहुंचा.
कूटनीतिक संदेश और भारत का क्या है रुख
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी एयरस्पेस से परहेज करना भारत का पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश है, खासकर तब जब हमले में पाकिस्तान समर्थित संगठन की भूमिका सामने आई है. भू-राजनीतिक विश्लेषक डेमियन साइमन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "पहलगाम हमले के बाद PM मोदी का विमान पाकिस्तानी एयरस्पेस से बचकर लौटा. यह सुरक्षा चिंताओं का परिणाम हो सकता है या फिर इस्लामाबाद के साथ भविष्य में तनाव की शुरुआत." दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद, PM मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल, विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिश्रा के साथ हवाई अड्डे पर एक आपातकालीन बैठक की. उन्होंने हमले की कड़ी निंदा करते हुए X पर लिखा, "पहलगाम में हुए आतंकी हमले की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं. पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना. घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं.''
बदला लेने के लिए भारत के पास विकल्प?
पहलगाम हमले और PM के इस कदम ने भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नए तनाव की आशंका को जन्म दिया है. कुछ रिपोर्ट्स में बालाकोट जैसे हवाई हमले की संभावना की भी चर्चा है, हालांकि सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक टीम पहलगाम में जांच के लिए पहुंच चुकी है. यह घटना न केवल कश्मीर में पर्यटन और शांति की कोशिशों के लिए चुनौती है, बल्कि भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करती है.