नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार नीतियों और भू-राजनीतिक स्वार्थों पर बड़ा बयान दिया। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को परोक्ष संदेश देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय जो ताकतें दुनिया को वैश्वीकरण (Globalization) का पाठ पढ़ाती थीं, आज वे पूरी तरह खामोश हैं और केवल अपने निजी हितों की रक्षा में जुटी हैं। ऐसे बदले हुए वैश्विक माहौल में भारत केवल दूसरों का बाजार बनकर नहीं रह सकता, बल्कि अपनी उत्पादन क्षमता और नेक्स्ट-लेवल रिफॉर्म्स के दम पर दुनिया के बाजारों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाएगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब भारत ने 'आत्मनिर्भरता' की शुरुआत की थी, तब एसी कमरों में बैठे कुछ लोग सवाल उठाते थे कि ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा। लेकिन पिछले एक दशक में दुनिया का रुख पूरी तरह बदल चुका है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई वैश्वीकरण की वकालत नहीं कर रहा; हर देश अपने आर्थिक व रणनीतिक हितों को साधने में लगा है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जब दुनिया अपने हितों को प्राथमिकता दे रही है, तो भारत को भी अपने सामर्थ्य और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
पीएम मोदी ने बताया कि भारत अपनी व्यापारिक पहुंच का विस्तार करते हुए दुनिया के 40 से अधिक देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) कर चुका है या अंतिम चरण में है। उन्होंने भारतीय एमएसएमई (MSME), टेक्सटाइल, फार्मा और सी-फूड सेक्टर से आह्वान किया कि वे इस वैश्विक अवसर को हाथ से न जाने दें। भारतीय उत्पादों को कॉस्ट, क्वालिटी और स्केल के मानकों पर खरा उतरना होगा ताकि दुनिया के कोने-कोने में 'मेड इन इंडिया' का परचम लहरा सके।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आने वाले 5 से 7 साल देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत अब साधारण सुधारों से आगे बढ़कर 'नेक्स्ट-लेवल रिफॉर्म्स' की ओर कदम बढ़ा रहा है। सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, हाइपरसोनिक तकनीक, आधुनिक रेलवे कोच और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत 'कंप्लीट मैन्युफैक्चरिंग' का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भारत की रफ्तार अब थमने वाली नहीं है और 2047 तक विकसित भारत बनने का संकल्प पूरा होकर रहेगा।