आपातकाल की 50 वीं बरसी पर प्रधानमंत्री का कांग्रेस पर तीखा हमला: Emergency को बताया भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे ''काला अध्याय''

Amanat Ansari 25 Jun 2025 10:25: AM 3 Mins
आपातकाल की 50 वीं बरसी पर प्रधानमंत्री का कांग्रेस पर तीखा हमला: Emergency को बताया भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे ''काला अध्याय''

Emergency Darkest chapters: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर संविधान की भावना को ठेस पहुंचाई और लोकतंत्र को कैद कर दिया.

आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर, जिसे केंद्र सरकार ने 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया है, पीएम मोदी ने एक्स पर कई पोस्ट किए. उन्होंने कहा कि कोई भी भारतीय यह नहीं भूल सकता कि कैसे उस समय संसद की आवाज को दबाया गया और कोर्ट को नियंत्रित करने की कोशिश की गई.

पीएम मोदी ने लिखा, "इस दिन संविधान के मूल्यों को ताक पर रखा गया, लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए, प्रेस की आजादी खत्म कर दी गई और कई राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और आम नागरिक जेल में डाल दिए गए. यह ऐसा था जैसे कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को ही कैद कर लिया!"

1975 से 1977 तक, लगभग दो साल तक चले आपातकाल को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लागू किया था. इस दौरान नागरिक स्वतंत्रता को निलंबित कर दिया गया और विपक्षी नेताओं व प्रेस की आजादी पर सख्त कार्रवाई की गई. यह आपातकाल कई राज्यों में कांग्रेस सरकारों के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शनों और इलाहाबाद हाई कोर्ट के इंदिरा गांधी के रायबरेली से चुनाव को अवैध घोषित करने के फैसले के बाद आया.

संसद की आवाज दबाई गई

प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे 42वें संवैधानिक संशोधन के जरिए कोर्ट को नियंत्रित करने की कोशिश की गई. 1976 का यह संशोधन सत्ता को केंद्रित करने और न्यायिक निगरानी को सीमित करने के लिए लाया गया था. उन्होंने कहा, "कोई भी भारतीय यह नहीं भूल सकता कि कैसे संविधान की भावना को तोड़ा गया, संसद की आवाज को दबाया गया और कोर्ट को नियंत्रित करने की कोशिश की गई. 42वां संशोधन इसका बड़ा उदाहरण है. गरीब, हाशिए पर रहने वाले और कमजोर लोग खास तौर पर निशाने पर थे, उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई."

लोकतंत्र की जीत

पीएम मोदी ने उन लोगों की तारीफ की जिन्होंने आपातकाल के खिलाफ डटकर संघर्ष किया. इस सामूहिक लड़ाई की वजह से कांग्रेस सरकार को नए चुनाव कराने पड़े, जिसमें उनकी बुरी तरह हार हुई. आपातकाल के खिलाफ लोगों का गुस्सा 1977 में इंदिरा गांधी की चुनावी हार का कारण बना, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में.

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम संविधान के सिद्धांतों को मजबूत करने और विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं."

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