
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से लगातार 12वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया. समारोह की शुरुआत पीएम मोदी द्वारा राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई. लाल किले पर पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करने के बाद, पीएम मोदी ने ध्वज फहराया. इस वर्ष का थीम 'नया भारत' है, जो 2047 तक 'विकसित भारत' के सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है.
इससे पहले पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में लिखा, "सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. यह दिन हमें हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने और विकसित भारत के निर्माण के लिए और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दे. जय हिंद!" "स्वतंत्रता का यह महान पर्व 140 करोड़ संकल्पों का पर्व है," पीएम ने लाल किले की प्राचीर से कहा, साथ ही जोड़ा कि यह आशा और आकांक्षाओं का पर्व है.
पीएम मोदी के भाषण की मुख्य बातें...
- "चाहे रेगिस्तान हो या हिमालय की चोटियां, समुद्र के किनारे हों या हलचल भरे शहर, पूरे देश में एक ही आवाज़ है: हम सभी भारत को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करते हैं."
- "75 वर्षों से, भारत का संविधान हमें एक प्रकाशस्तंभ की तरह मार्ग दिखा रहा है."
- "मैं हमारे बहादुर सैनिकों को सलाम करता हूं, जिन्होंने आतंक के आकाओं को उनकी कल्पना से परे दंड दिया."
- "भारत ने फैसला किया है कि वह अब परमाणु खतरों को बर्दाश्त नहीं करेगा, हम किसी भी ब्लैकमेल के सामने नहीं झुकेंगे. हमारे सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान में की गई तबाही इतनी व्यापक थी कि हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. 22 अप्रैल (पहलगाम हमले) के बाद, हमने सशस्त्र बलों को आतंकियों का जवाब देने की पूरी छूट दी."
- "भारत ने अब फैसला किया है, खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे. लोगों को यह अहसास हो गया है कि सिंधु जल संधि अन्यायपूर्ण है. सिंधु नदी प्रणाली का पानी दुश्मन की जमीनों को सींच रहा है, जबकि हमारे अपने किसान पीड़ित हैं. यह कैसा समझौता है, जिसने पिछले सात दशकों से हमारे किसानों को इतना भारी नुकसान पहुंचाया है?"
- "गुलामी ने हमें गरीब बनाया. इसने हमें दूसरों पर निर्भर बना दिया, और समय के साथ हमारी यह निर्भरता बढ़ती गई. लेकिन हमारे किसानों ने हमें आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया और हमारी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की. आज भी, किसी राष्ट्र का सच्चा गौरव आत्मनिर्भरता में निहित है, और यही विकसित भारत की नींव है."
- "दूसरों पर निर्भरता एक राष्ट्र की स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है जब निर्भरता एक आदत बन जाती है, एक खतरनाक आदत. इसलिए हमें जागरूक और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रतिबद्ध रहना होगा. आत्मनिर्भरता केवल निर्यात, आयात, रुपये या डॉलर के बारे में नहीं है. यह हमारी क्षमताओं, हमारी आत्मनिर्भरता की ताकत के बारे में है."
- "हमारे दुश्मनों को 'मेड इन इंडिया' की क्षमता का कोई अंदाज़ा नहीं था, कि कौन से हथियार साधारण हैं और कौन से इतने शक्तिशाली हैं कि उन्हें पल भर में नष्ट कर सकते हैं. जरा सोचिए, अगर हम आत्मनिर्भर नहीं होते, तो क्या हम ऑपरेशन सिंदूर को इतनी तेजी से अंजाम दे पाते?"
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