प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वीडन दौरे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया इंग्रिड एलिस डेज़िरे प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित करती नजर आ रही हैं। इसके बाद लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर स्वीडन की भविष्य की महारानी कौन हैं और उनकी कहानी इतनी खास क्यों मानी जाती है।
क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया की मां सिल्विया मूल रूप से जर्मनी के एक सामान्य परिवार से थीं। साल 1972 के समर ओलंपिक के दौरान उनकी मुलाकात स्वीडन के युवराज कार्ल सोलहवें गुस्ताफ से हुई थी। कहा जाता है कि पहली मुलाकात के बाद ही युवराज ने कहा था कि यह लड़की उनकी जिंदगी बदल देगी। हालांकि शुरुआत में शाही परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं था, लेकिन करीब चार साल बाद 1976 में दोनों की शादी हुई और सिल्विया स्वीडन के शाही परिवार का हिस्सा बन गईं।
साल 1977 में विक्टोरिया का जन्म हुआ। उनके जन्म के कुछ साल बाद स्वीडन में कानून बदला और बेटियों को भी उत्तराधिकारी बनने का अधिकार मिला। इसके बाद विक्टोरिया को भविष्य की महारानी माना जाने लगा। बचपन में उन्हें डिस्लेक्सिया जैसी समस्या का सामना करना पड़ा, वहीं बाद में एनोरेक्सिया जैसी बीमारी से भी जूझना पड़ा। कठिन दौर के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
उनकी निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही। साल 2002 में उनकी मुलाकात फिटनेस ट्रेनर डेनियल से हुई। दोनों के रिश्ते को शुरुआत में शाही परिवार की मंजूरी नहीं मिली, क्योंकि डेनियल सामान्य परिवार से थे। लेकिन करीब आठ साल बाद 2010 में दोनों ने शाही अंदाज में शादी की, जिसे स्वीडन की सबसे भव्य शादियों में गिना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी को मिले सम्मान के बाद एक और चर्चा तेज हुई कि आखिर दुनिया के अलग-अलग देश उन्हें सर्वोच्च सम्मान क्यों देते हैं। दरअसल, किसी भी देश में ऐसे सम्मान देने का प्रस्ताव वहां की सरकार और विशेष समितियों की सिफारिश पर तैयार होता है, जिसे बाद में शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलती है।
इस दौरे की एक खास बात यह भी रही कि स्वीडन के प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी को रविंद्रनाथ टैगोर की एक दुर्लभ तस्वीर भेंट की, जो अब भारत लाई जा रही है।