चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में हॉर्स-ट्रेडिंग और सांसदों को तोड़ने के आरोप तेज हो गए हैं. शनिवार को विपक्षी दलों DMK, AIADMK और BJP की अलग-अलग डेलिगेशनों ने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और TVK सरकार के खिलाफ ज्ञापन सौंपा. दलों ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तमिलागा वेट्ट्री कझगम (TVK) विधायकों को तोड़ने, पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग और निजी व्यक्तियों के सरकारी कामकाज में अनधिकृत हस्तक्षेप कर रही है.
DMK का आरोप
DMK की ओर से संगठन सचिव आरएस भारती के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला. ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि TVK सरकार विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है. पुलिस का दुरुपयोग करके विधायकों पर दबाव बनाया जा रहा है. दो निजी व्यक्ति, जॉन (जॉन अरोकियासामी) और विष्णु रेड्डी मंत्रियों से ज्यादा ताकतवर हो गए हैं. वे उच्च-स्तरीय बैठकें में शामिल होते हैं और अधिकारियों को आदेश देते हैं.
भारती ने कहा, ''तिरुचेन्दूर विधायक अनीता आर राधाकृष्णन सहित हमारे विधायकों को परेशान किया जा रहा है, कानूनी दबाव और पैसे के लालच से तोड़ने की कोशिश हो रही है.'' DMK ने पहले भी मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी.
AIADMK और BJP का रुख
AIADMK ने भी घोड़े-बाजारी, विधायकों की इस्तीफे करवाने और निजी लोगों के कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने का आरोप लगाया. पार्टी ने संवैधानिक हस्तक्षेप (आर्टिकल 167) की मांग की. BJP ने जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी के कैबिनेट मीटिंग में शामिल होने का मुद्दा उठाया और उच्च शिक्षा मंत्री पी विश्वनाथन पर एक नाबालिग लड़की से अनुचित व्यवहार का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की.
TVK का जवाब
TVK सरकार ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि जॉन और विष्णु रेड्डी को मुख्यमंत्री के स्पेशल एडवाइजर नियुक्त किया गया है, इसलिए वे निजी व्यक्ति नहीं रहे. राज्यपाल ने DMK के ज्ञापन का जिक्र करते हुए X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि पार्टी ने अवैध गिरफ्तारी, हिरासत में जबरन दबाव और लोकतंत्र की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. यह घटनाक्रम तमिलनाडु में सत्तारूढ़ TVK सरकार के खिलाफ विपक्ष के हमले को और तेज करता दिख रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तीखा हो सकता है.