कोलकाता: नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर 136 साल पुरानी बांकरा मस्जिद (गौरीपुर जामा मस्जिद) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. सुरक्षा कारणों से मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई है और सुवेंदु अधिकारी सरकार अब इसे शिफ्ट करने की कवायद तेज कर रही है. एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे से सिर्फ 165 मीटर की दूरी पर बनी यह मस्जिद हवाई अड्डे के विस्तार और सुरक्षा के लिए बड़ी बाधा बन गई है. एविएशन नियमों के मुताबिक किसी भी इमारत को रनवे से कम से कम 240 मीटर दूर होना चाहिए, लेकिन मस्जिद इस दूरी का उल्लंघन कर रही है.
क्यों बनी समस्या?
पिछले हफ्ते ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) की चेतावनी के बाद मस्जिद में आम नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई. पहले आधार कार्ड दिखाकर 50-80 लोग नमाज पढ़ने जाते थे, लेकिन अब CISF की सख्ती बढ़ गई है. सुवेंदु अधिकारी सरकार और बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है. एयरपोर्ट बांग्लादेश और चीन की सीमा के करीब है, इसलिए यहां बिना बायोमेट्रिक चेक के लोगों का आना-जाना जोखिम भरा है.
उत्तर दम दम के MLA सौरव सिकदार ने कहा कि पास में स्थित मंदिर को भी शिफ्ट किया जाएगा. "विकास में कोई समझौता नहीं होगा."
वहीं, जमीअत उलेमा-ए-हिंद के नेता सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने जबरन शिफ्टिंग का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि मस्जिद एयरपोर्ट से पहले बनी थी. कोलकाता एयरपोर्ट देश का छठा सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है, जहां रोज 60-70 हजार यात्री आते हैं. दुर्गा पूजा में तो संख्या 3 लाख तक पहुंच जाती है. अब सवाल यह है कि क्या नई सरकार इस लंबे समय से लंबित विवाद को हल कर पाएगी और एयरपोर्ट को विश्व स्तर का बना पाएगी?