फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) ने सोमवार को देश भर में हड़ताल की शुरुआत की. वे कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज (RG Kar Medical College) में बलात्कार और हत्या (Kolkata doctor rape-murder) की शिकार हुई प्रशिक्षु डॉक्टर के लिए न्याय की मांग करते हुए देश भर के विभिन्न अस्पतालों के बाहर एकत्र हुए. डॉक्टर दिल्ली के लोक नायक अस्पताल, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल और देश भर के कई अस्पतालों के बाहर एकत्र हुए और पीड़िता के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए.
मीडिया से बात करते हुए FORDA के महासचिव सर्वेश पांडे ने बताया कि देश भर के करीब 3 लाख डॉक्टर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं और उन्होंने मांग की है कि अन्य लोग भी इसमें शामिल हों. उन्होंने आगे बताया कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक अनिश्चित काल तक अपनी हड़ताल जारी रखेंगे. डॉ. सर्वेश पांडे ने कहा कि जब तक हमें लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता कि हमारी मांगें पूरी होंगी, हम अपनी हड़ताल जारी रखेंगे. डॉक्टर मामले की सीबीआई जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट और सभी अस्पतालों में केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए एक समिति के गठन की मांग कर रहे हैं. फोर्डा इंडिया के अध्यक्ष डॉ. अविरल माथुर ने कहा कि इस घटना की सभी को निंदा करनी चाहिए.
कल हमने फोर्डा के तहत राष्ट्रव्यापी हड़ताल के लिए एक नोटिस जारी किया था, जिसमें हमने कुछ मांगें रखी थीं...जब हमारी मांगों पर विचार किया जाएगा, तब हम हड़ताल वापस ले लेंगे, क्योंकि हम नहीं चाहते कि मरीजों को परेशानी हो. मरीजों की सुविधा के लिए आपातकालीन सेवाएं जारी हैं...हमारा संगठन लगातार मंत्रालय के संपर्क में है. हमें पूरा विश्वास है कि हमारी मांगें पूरी होंगी.
डॉ. राम मनोहर लोहिया में प्रदर्शन कर रहे एक डॉक्टर ने डॉक्टरों की मांग गिनाते हुए कहा कि हमारी तीन मुख्य मांगें हैं. पहली, सीबीआई से फास्ट ट्रैक जांच करवाई जाए, क्योंकि राज्य सरकार की जांच बहुत पक्षपातपूर्ण है. वे किसी भी निर्दोष को पकड़कर हमें चुप कराना चाहते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे. यह सामूहिक बलात्कार और हत्या है, जिसे 2-3 लोगों ने अंजाम दिया है. यह निर्भया का दूसरा भाग है. दूसरी, आरजी कर के असंवेदनशील अधिकारी जो डॉक्टरों के ड्यूटी रूम में 'रात में लड़की अकेली क्या कर रही थी' जैसे बयान जारी कर रहे हैं, उन्हें हमेशा के लिए हटाया जाए. तीसरी, पूरे भारत के अस्पतालों में केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम लागू किया जाए.
इससे पहले, कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) संदीप घोष (Sandeep Ghosh) ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी. प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी. अस्पताल से बाहर निकलते समय संदीप घोष ने संवाददाताओं से कहा कि सोशल मीडिया पर मेरी बदनामी हो रही है...मृतक डॉक्टर मेरी बेटी की तरह थी. एक अभिभावक के तौर पर मैं इस्तीफा देता हूं...मुझे नहीं लगता कि भविष्य में किसी के साथ ऐसा हो.
इस बीच, लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय ने तीन जूनियर डॉक्टरों और एक हाउस स्टाफ को तलब किया है. कोलकाता पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना की रात वे ड्यूटी पर थे. 9 अगस्त को हुई इस दुखद घटना के बाद से व्यापक आक्रोश और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.