नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के चार महत्वपूर्ण देशों का दौरा शुरू कर दिया है. कांग्रेस के मीडिया इंचार्ज पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि की. बताया गया कि गांधी विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों, प्रभावशाली राजनेताओं, व्यापारिक हस्तियों और युवा छात्रों के साथ गहन चर्चाएं करेंगे. हालांकि, यात्रा की अवधि या अन्य देशों के नामों का खुलासा अभी नहीं किया गया.
कांग्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी ब्राजील और कोलंबिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में छात्रों के साथ संवाद करेंगे, जहां वे भारत की लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक चुनौतियों पर विचार साझा करेंगे. इसके अलावा, वे कई देशों के राष्ट्रपतियों व शीर्ष नेताओं से भेंट करेंगे, ताकि द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारियां मजबूत हों.
व्यापारिक समुदाय के साथ बैठकें भी निर्धारित हैं, जिसमें अमेरिकी टैरिफ नीतियों के बाद उभरते अवसरों पर फोकस होगा—जैसे नई साझेदारियां और आर्थिक सहयोग. यह दौरा ग्लोबल साउथ की एकजुटता को बढ़ावा देने का भी हिस्सा बताया जा रहा है. कांग्रेस इसे राहुल गांधी की वैश्विक कूटनीतिक क्षमता को मजबूत करने का कदम मान रही है, जो भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से पेश करेगा.
दूसरी ओर, भाजपा ने इस यात्रा पर सवालों की बौछार कर दी है. पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर तंज कसते हुए लिखा कि राहुल गांधी एक बार फिर विदेशी मित्रों के साथ 'गुप्त सौदे' करने निकल पड़े हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि यह दौरा भारत के लोकतंत्र और संप्रभुता के खिलाफ वैश्विक मोर्चेबंदी का हिस्सा है, जिसमें जॉर्ज सोरोस जैसे विवादास्पद चेहरों का रोल हो सकता है.
भंडारी ने अतीत के उदाहरण गिनाए, जैसे इल्हान उमर से मुलाकात और खालिस्तानी समर्थक गुरुपतवंत सिंह पन्नू का समर्थन और कहा कि राहुल गांधी विदेशी हस्तक्षेप की वकालत करते रहे हैं. उन्होंने यह भी इशारा किया कि जब लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया, ठीक उसी समय गांधी विदेश चले गए. यह विवाद राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा सकता है, खासकर जब भारत की विदेश नीति पर बहस तेज हो रही हो. क्या यह यात्रा वाकई कूटनीतिक सफलता साबित होगी या राजनीतिक हथियार? आने वाले दिनों में साफ होगा.