गाजियाबाद : रक्षाबंधन सिर्फ कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के उस अटूट रिश्ते का प्रतीक है, जिसमें दोनों एक-दूसरे की खुशियों और सुरक्षा के लिए हर हद तक जाने का संकल्प लेते हैं. गाजियाबाद से सामने आई एक बहन की कहानी ने इस रिश्ते की गहराई को हकीकत में साबित कर दिया है. भाई की जिंदगी बचाने के लिए बहन ने अपनी किडनी दान कर दी और उसे नया जीवन देने में अहम भूमिका निभाई.
गाजियाबाद के रहने वाले भाई-बहन की यह कहानी रक्षाबंधन के मौके पर सामने आई है. बताया गया कि भाई लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे. बीमारी के चलते उनकी हालत लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी और परिवार के सामने इलाज को लेकर बड़ी चिंता थी. ऐसे मुश्किल समय में बहन ने अपने भाई का साथ छोड़ने के बजाय एक ऐसा फैसला लिया, जिसने भाई-बहन के रिश्ते को त्याग और समर्पण की मिसाल बना दिया.
परिवार के मुताबिक, चिकित्सकीय जांच और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद बहन ने भाई को अपनी किडनी डोनेट करने का फैसला किया. ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाई की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जगी. बहन के इस फैसले ने न सिर्फ भाई को जीवन का नया मौका दिया, बल्कि परिवार के लिए भी यह पल बेहद भावुक और यादगार बन गया.
रक्षाबंधन पर जब बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं इस बहन ने अपने भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपना अंग तक दान कर दिया. इस कहानी ने साबित कर दिया कि राखी का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं बंधता, बल्कि जरूरत पड़ने पर बहन अपने त्याग से भाई की जिंदगी की डोर भी मजबूत कर सकती है. बहन के इस साहस और समर्पण की हर तरफ सराहना हो रही है.