नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन की वसूली के तरीकों को और अधिक पारदर्शी व मानवीय बनाने के लिए नए सख्त दिशानिर्देशों का ड्राफ्ट जारी किया है. ये प्रस्तावित नियम मुख्य रूप से कर्जदारों को अनुचित परेशानी और धमकी से बचाने पर केंद्रित हैं. इससे कर्जदारों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पहले कई मामलों में एजेंटों द्वारा अनुचित दबाव की शिकायतें आती रही हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बजट 2026 में लोन रिकवरी में सुधार की बात कही थी, जिसके बाद RBI ने ये कदम उठाया है.
मुख्य बदलाव क्या हैं?
बैंकों की जिम्मेदारियां तय
बैंकों को एक स्पष्ट, बोर्ड-अनुमोदित नीति बनानी होगी जो रिकवरी प्रक्रिया, एजेंटों की नियुक्ति और संपत्ति कब्जे के नियमों को कवर करे. रिकवरी से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग से समर्पित व्यवस्था (grievance redressal mechanism) होनी चाहिए. एजेंटों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी अनुचित व्यवहार से बैंक की छवि प्रभावित न हो.
ये ड्राफ्ट गाइडलाइंस RBI (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Second Amendment Directions, 2026 के नाम से जारी की गई हैं. अभी ये सिर्फ प्रस्ताव हैं. आम जनता, बैंकों और अन्य हितधारकों से 6 मार्च 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं. अंतिम रूप लेने के बाद ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो जाएंगे.