ये तस्वीरें हैं काशी-तमिल संगमम 4.0 की...सीएम योगी केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ मंच पर बैठकर प्रोग्राम देख रहे थे, उनके भाषण की बारी आने वाली थी, तभी भीड़ की ओर से जहां करीब तीन लेयर की सिक्योरिटी पहले से मुस्तैद होती है, उसे तोड़कर एक लड़का सीएम योगी के मंच तक पहुंच जाता है, मंच से सीधा योगी के टेबल तक पहुंच जाता है, उसके सामने धर्मेंद्र प्रधान थे, पानी की बोतल थी और योगी से उसकी दूरी कुछ ही मीटर की थी....योगी खड़े होने की कोशिश करते हैं, धर्मेंद्र प्रधान भी अलर्ट होते हैं...तभी कमांडो आते हैं, उसे पकड़ते हैं, जैकेट से खींचते हैं और ले जाते हैं...पूछताछ में वही पुराना रवैया सामने आता है कि मानसिक रूप से अस्थिर था, लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि 4 महीने के भीतर योगी की सुरक्षा में दूसरी बार सेंध कैसे लग गई....इससे पहले 6 अगस्त 2025 को जब योगी मुरादाबाद के सर्किट हाउस के दौरे पर थे, एक व्यक्ति गले में फर्जी आईडी कार्ड लटकाए, कार पर विधायक का नंबर प्लेट लगाए सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश करता पकड़ा गया...ऐसी ख़बरें मीडिया में सामने आई...
वाराणसी: योगी आदित्यनाथ के मंच तक पहुंचा युवक, एसपीजी कमांडो ने पकड़ा @NavbharatTimes pic.twitter.com/VFCJSNLPYn
— NBT Uttar Pradesh (@UPNBT) December 2, 2025
हालांकि एसपी ने जांच के बाद कहा कि जिस पर संदेह हुआ, उसे गेट पर ही रोक लिया गया और पूरी जांच के बाद स्थिति साफ होने पर उसे वापस भेज दिया गया. दोनों व्यक्ति पार्टी कार्यकर्ता थे जिनमें से एक ने गलती से किसी और का पास उठा लिया था. ये सुरक्षा में चूक नहीं बल्कि मानवीय भूल थी..
यानि यहां पुलिस ने इसे सुरक्षा में चूक नहीं माना...अब थोड़ा और पीछे चलते हैं. 20 सितंबर 2023 को जब योगी की फ्लीट एक गड्ढे में फंसी और काफिला 2 मिनट तक रुका रहा, स्थानीय प्रशासन तक पर सवाल उठे, तब सुरक्षा में चूक का शोर खूब गूंजा..और ये बात भी बीते लंबे वक्त से मीडिया में कि लखनऊ में करीब 4 लाख बांग्लादेशी रहते हैं, तो योगी की सुरक्षा क्या एसपीजी लेवल की कर देनी चाहिए, ताकि सुरक्षा में सेंध की घटना कभी और न हो....
काशी के मामले में एसीपी विदुष सक्सेना ने मीडिया से कहा कि पकड़े गए व्यक्ति का नाम जोगिंदर गुप्ता है, वाराणसी के बजरिया इलाके का रहने वाला है, उसके घरवालों ने बताया वो अक्सर नशे की हालत में घर से निकल जाता है, उसका इलाज चल रहा है. आवश्यक कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है..
लेकिन ये मामला यहां खत्म नहीं होता, बल्कि बीते कई घटनाओं में ऐसा देखा गया है कि सुरक्षा में सेंध की कोशिश के बाद मानसिक रूप से बीमार वाली थ्योरी सामने आती है...वाराणसी वाले केस में ये भी पता चला है वो व्यक्ति अपने इलाके में शराब बिक्री की मांग कर रहा था, यानि उसे सही और गलत का फर्क मालूम है, उसे ये भी पता है मुख्यमंत्री तक समस्या कैसे पहुंचानी है...फिर भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो, इसके लिए सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं...
घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं कि युवक कड़े सुरक्षा घेरे को पार कर मुख्यमंत्री के मंच तक कैसे पहुंच गया. जब ये घटना हुई भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी, LIU और स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी थी. वीडियो फुटेज और सुरक्षा लेयर्स को इसने तोड़ा कैसे, इसकी समीक्षा कमांडोज को करनी होगी. उसके बाद ये तय करना होगा कि योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा में किस स्तर के बदलाव की जरूरत है.