नई दिल्ली: सऊदी अरब इंटरसेप्टर मिसाइलों की गंभीर कमी से जूझ रहा है. यमन के हूती विद्रोहियों के तेज हमलों ने स्थिति और खराब कर दी है. किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हुए घातक हमले में 13 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए. इसके बाद हूतियों ने और हमलों की धमकी दी है.
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, देश के एयर डिफेंस सिस्टम में इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट रहा है. सऊदी बलों ने एयर डिफेंस बैटरियों को देश भर में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है. ये बैटरियां प्रमुख तेल सुविधाओं, एयरपोर्ट्स और शाही महलों की सुरक्षा के लिए लगाई जा रही हैं. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
वे भारी सुरक्षा वाले बंकर युक्त महलों के बीच लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं और चुनिंदा कर्मियों के साथ रह रहे हैं. सऊदी अरब के पास एडवांस पैट्रियट और थाड सिस्टम हैं, लेकिन विशाल भूभाग पर बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव करना बेहद चुनौतीपूर्ण है.
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हमलों से इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार खत्म होता जा रहा है. सऊदी अरब अब महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है और सहयोगी देशों से मदद की मांग भी कर रहा है.