Dhadak 2 Movie: धड़क 2 पर लगे सवर्ण विरोधी होने का आरोप, करण जौहर-शाजिया इकबाल का सवर्णों पर निशाना, सेंसरबोर्ड ने लगाए 16 कट, बड़ा खुलासा

Rahul Jadaun 26 May 2025 01:44: PM 2 Mins
Dhadak 2 Movie: धड़क 2 पर लगे सवर्ण विरोधी होने का आरोप, करण जौहर-शाजिया इकबाल का सवर्णों पर निशाना, सेंसरबोर्ड ने लगाए 16 कट, बड़ा खुलासा

Dhadak 2 Movie: करण जौहर की एक और मूवी पर विवाद खड़े होने लगे हैं. इस मूवी से देश में माहौल ना बिगड़ जाए इसलिए सेंसर बोर्ड ने इस मूवी में 16 जगह कैंची चलाई है, इस मूवी का नाम है धड़क-2, फिल्म में सिद्धांत चतुर्वेदी और तृप्ति डिमरी की जोड़ी नजर आने वाली है. मूवी का निर्देशन शाजिया इकबाल ने किया है. अगर इस मूवी में बदलाव की बात करें तो 11 डायलॉग भी बदले गए हैं, सबसे पहले अब इन डायलॉग को पढ़िए और इनमें हुए बदलाव को भी. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से इस मूवी को U/A सर्टिफिकेट मिल गया है. लेकिन इसके लिए 16 कट भी लगाए गए हैं.

फिल्म में 11 बदलाव हुए

सबसे बड़ी बात ये है कि सर्टिफिकेट मिलने से पहले भी सेंसर बोर् ने धड़क-2 के कई सीन में बदलाव भी करवाया था.  जिसमें कई जातिसूचक और राजनीतिक डायलॉग भ शामिल हैं. इसके अलावा मूवी कई सीन भी बदले गए हैं, द हिंदू की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि किन सीन और डायलॉग में चेंज किया गया है.

  • हला डायलॉग- इसमें बोला गया है कि '3,000 साल का बैकलॉग सिर्फ 70 साल में पूरा नहीं होगा.' जिस डायलॉग में 3 हजार साल को इतने सालों शब्द से बदल दिया गया है, और नया डायलॉग बना है इतने सालों का बैकलॉग सिर्फ 70 सालों में पूरा नहीं हो सकता है.
  • दूसरा डायलॉग- निलेश, ये कलम देख रहे हो, वे दुनिया पर राज कर रहे हैं. (इस डायलॉग में बसपा के संस्थापक कांशीराम की उस लोकप्रिय उपमा का जिक्र गया है जिसमें ऊंची जाति को कलम की निब बताया गया है.) इस डायलॉग को बदल कर ये छोटा सा ढक्कन पूरी कलम का छोटा सा हिस्सा है और बाकी के हम हैं, में बदला गया है
  • कुछ संवादों में जाति से जुड़े शब्दों को हटा दिया गया है और उनकी जगह 'जंगली' जैसे सामान्य शब्दों का प्रयोग किया गया है।
  • इस डायलॉग में डायलॉग "ये धर्म का काम है" लाइन में धर्म को पुण्य से बदल दिया गया है.
  • एक संवाद जिसमें कहा गया था "सवर्णों के सड़क...हमें जला देते थे..." को बदलकर "ना सड़के हमारी थीं, ना ज़मीन..." जैसे संवाद से रिप्लेस किया गया है।
  • फिल्म में एक महिला पर हिंसा वाला दृश्य था, जिसे अब ब्लैक स्क्रीन से कवर कर दिया गया है।
  • "ठाकुर का कुआं" शीर्षक से जुड़ी कविता को भी सेंसर बोर्ड ने हटवाया है।
  • संत तुलसीदास के दोहे पर आधारित गाने के बोलों में भी बदलाव करवाया गया है।
  • इसके अलावा एक बदलाव ये भी किया गया है कि मूवी की शुरूआत में पहले 20 सेकंड का डिस्क्लेमर दिया गया था जिसका समय अब बढ़ा कर लगभग 1 मिनट 51 सेकंड तक कर दिया गया है, साथ ही निर्देश दिया गया है कि इसे स्पष्ट और जोर से पढ़ा जाए।
  • तीन दृश्यों में विज़ुअल कट लगाए गए हैं, जैसे एक दृश्य जिसमें एक दलित पात्र (निलेश) के साथ आपत्तिजनक हरकत होती है, उसे हटा दिया गया है।
  • निलेश के पिता को अपमानित करने वाला दृश्य भी छोटा कर दिया गया है।

बता दें कि हमेशा से ही बॉलिवुड इंडस्ट्री पर सवर्ण विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं, आरोप ये भी कई बार लगाए गए हैं कि जानबूझ कर सवर्ण जातियों खास तौर से ब्राह्मण और ठाकुरों को बॉलिवुड में अत्याचारी और बलात्कारी दिखाया गया है. जबकि कोई ऐतिहासिक मूवी बनती है तो उसके तथ्यों से भी छेड़छाड़ की जाती है. ऐसे में अब ये भी देखना होगा कि जब मूवी रिलीज होती है तो क्या करण और शाजिया की जोड़ी इन जातियों को शांत रख पाएंगी?

 

 

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