नई दिल्ली: सिक्किम में एनएचपीसी (NHPC) की तीस्ता चरण-VI जलविद्युत परियोजना (Teesta Stage-VI Hydroelectric Project) की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। टनल ढहने के बाद से जारी युद्धस्तर के बचाव अभियान में अब तक 22 श्रमिकों के शव मलबे से बाहर निकाले जा चुके हैं। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें भारी बर्फबारी और विषम मौसम के बीच लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीस्ता नदी के निकट स्थित इस सुरंग के अंदर जब मजदूर और इंजीनियर्स अपने नियमित काम पर तैनात थे, तभी अचानक सुरंग का एक बड़ा ऊपरी हिस्सा ढह गया। टनल के भीतर भारी मात्रा में मलबा, चट्टानें और पानी भर जाने के कारण अंदर काम कर रहे कर्मियों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीमों ने हेवी अर्थ मूवर्स और सेंसर्स की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गुरुवार, 23 जुलाई 2026 तक 22 शवों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जिनकी पहचान और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, अपनों की तलाश जारी
हादसे वाली जगह पर फंसे मजदूरों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई राज्यों से आए मजदूरों के रिश्तेदार टनल के बाहर अपनों की सलामती की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं।
एनडीआरएफ के अधिकारियों का कहना है कि टनल के अंदर हवा और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष पाइपों का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश और भूस्खलन की आशंका के चलते राहत कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
उच्चस्तरीय जांच के आदेश
सिक्किम सरकार और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस भीषण हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने मृतक श्रमिकों के परिजनों के लिए उचित मुआवजे की घोषणा की है और टनल सुरक्षा मानकों (Tunnel Safety Standards) में हुई किसी भी तरह की चूक की जांच के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित की है।