नई दिल्ली: बिहार मतगणना के बीच मुस्लिम बहुल इलाके सीमांचल का हालबिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना तेजी से चल रही है. शुरुआती रुझानों में एनडीए बहुमत की ओर अग्रसर दिख रहा है, लेकिन मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र जिसमें किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार जैसे जिले आते हैं की स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है.
यहां 24 सीटों पर नजरें टिकी हैं, जहां अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या 40-70% तक है. हालांकि शुरुआती रुझानों में महागठबंधन और एनडीए में कांटे की टक्कर दिख रही है. यहां 16 सीटों पर शुरुआती रुझान आ चुके हैं, जिसमें 8 पर महांगठबंधन तो आठ बार एनडीए को बढ़त है. 2020 के परिणामों की बात करें तो पिछली बार एनडीए ने इस क्षेत्र में 12 सीटें जीतीं (बीजेपी 8, जेडीयू 4), जबकि महागठबंधन को 7 मिलीं (कांग्रेस 5, आरजेडी 1, सीपीआई-एमएल 1).
एआईएमआईएम ने 5 सीटों पर कब्जा किया था, जो अल्पसंख्यक वोटों को बांटने का बड़ा कारक बना. इस बार महागठबंधन को फायदा मिलने की उम्मीद थी, क्योंकि मुस्लिम वोटों का एकजुट होना आरजेडी-कांग्रेस के पक्ष में जाता है. लेकिन एनडीए की मजबूत लामबंदी और स्थानीय मुद्दों (जैसे घुसपैठिया बहस) ने हिंदू वोटों को एकजुट कर दिया है.
किशनगंज सदर जैसी सीटों पर महागठबंधन आगे दिख रहा है, जबकि पूर्णिया और धमदाहा में बीजेपी मजबूत पकड़ बना रही है. जनसुराज पार्टी ने भी अररिया और जोकीहाट में अभियान चलाया, जो दो सीटों पर रुझान दिखा रही है. बता दें कि दूसरे चरण में सीमांचल ने सबसे ज्यादा 75% से ऊपर मतदान किया.
किशनगंज 78%, कटिहार 78%, पूर्णिया 76% और अररिया 70%. यह 2020 के 60% से 12-15% ज्यादा है, जो वोटरों के उत्साह को दर्शाता है. विशेष रूप से मुस्लिम बहुल 32 सीटों पर औसत 74.5% टर्नआउट दर्ज हुआ, जो महागठबंधन के लिए सकारात्मक संकेत था.
बीजेपी ने घुसपैठ और अवैध प्रवास के मुद्दे को उठाकर हिंदू मतदाताओं को लामबंद किया, जबकि महागठबंधन ने सामाजिक न्याय और विकास पर जोर दिया. यदि मुस्लिम वोट एकजुट रहे, तो महागठबंधन 10-12 सीटें हासिल कर सकता है, लेकिन एआईएमआईएम या जनसुराज का हस्तक्षेप गणित बदल सकता है. दोपहर तक स्पष्ट तस्वीर उभरने की उम्मीद है.