कानपुर : उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत परिवहन विभाग में बड़ी कार्रवाई हुई है. शासन ने एआरटीओ आलोक कुमार और एआरटीओ प्रवर्तन सोमलता यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. दोनों अधिकारियों को कार्यालय से अटैच किया गया है. इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.
दरअसल, बीते दिनों परिवहन विभाग के कार्यालय पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी की थी. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आरटीओ कार्यालय के गेट पर ताला लगवाकर जांच शुरू की गई थी. अचानक हुई इस कार्रवाई से कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी.
छापेमारी के दौरान परिवहन विभाग में लंबे समय से चल रही कथित अनियमितताओं को लेकर कई अहम सबूत सामने आए थे. पुलिस ने कार्यालय परिसर और उसके आसपास सक्रिय कई दलालों को गिरफ्तार किया था. वहीं, कार्रवाई की भनक लगते ही कुछ दलाल आरटीओ कार्यालय की बाउंड्री कूदकर मौके से फरार हो गए थे.
जांच के दौरान वाहन संबंधी काम कराने, परमिट, फिटनेस और अन्य विभागीय कार्यों के नाम पर कथित तौर पर रिश्वतखोरी और वसूली के आरोपों से जुड़े कई साक्ष्य भी सामने आए थे. इसके बाद शासन स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया.
अब शासन ने एआरटीओ आलोक कुमार और एआरटीओ प्रवर्तन सोमलता यादव पर निलंबन की कार्रवाई की है. दोनों अधिकारियों को उनके मौजूदा कार्यालय से अटैच कर दिया गया है. माना जा रहा है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई हो सकती है.
योगी सरकार की इस कार्रवाई को परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार और दलाली के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है. सरकार की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अवैध वसूली को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.