दिल्ली: सीजेपी का प्रदर्शन पिछले 19 दिन से जारी है, NEET परीक्षा की वजह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पूरे जोर-शोर से मांगा जा रहा है। समाज सुधारक और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से इसी प्रदर्शन में भूख हड़ताल पर हैं। इस लंबे अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। ताज़ा मेडिकल इनपुट्स के मुताबिक, भूख हड़ताल के चलते अब तक उनका 7 किलोग्राम से अधिक वजन कम हो चुका है, जिसके बाद उनका मौजूदा वजन सिर्फ 59 किलोग्राम ही बचा है। डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है।
जंतर-मंतर पर मांगों को लेकर डटे हैं वांगचुक
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान जब तक इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक वो लोग अपना प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। लेकिन फिलहाल सरकार की तरफ से इस प्रदर्शन को खत्म कराने की तरफ कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर राजनीतिक और सामाजिक नेताओं का तांता लग गया है। विपक्षी गुटों के नेताओं ने अनशन स्थल पर पहुंचकर लद्दाख के इस आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें राजधानी के जंतर-मंतर जैसे प्रमुख स्थलों पर अपनी बात रखने के लिए भी कड़े प्रशासनिक प्रतिबंधों और पुलिसिया दबाव का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह सत्याग्रह लद्दाख के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अंतिम सांस तक जारी रहेगा।
अभिजीत दिपको को मिल रहा वांगचुक का समर्थन
दरअसल ये आंदोलन अभिजीत दिपके ने शुरू किया था। उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर एक पार्टी बनाई जिसका नाम कॉकरोच जनता पार्टी रखा गया। उसके बाद अभिजीत को जब ट्रोल किया जाने लगा तो वो दिल्ली आते हैं, पहले एकदिवसीय प्रदर्शन किया जाता है। जो बुरी तरह असफलता होता है। उसके बाद कई राज्यों में घूमने के बाद अभिजीत ने ये प्रदर्शन जंतर-मंतर पर शुरू किया जो अभी तक बदस्तूर जारी है। यहां सबसे बड़ी बात ये है कि आंदोलन अभिजीत दिपके का है। लेकिन लगातार भूख हड़ताल पर बैठ कर जान दांव पर सोनम वांगचुक की लगी हुई है।